महेश नवमी  

महेश नवमी
शिव प्रतिमा, बैंगलौर
विवरण 'महेश नवमी' भगवान शिव से सम्बन्धित है। यह 'माहेश्वरी धर्म' में विश्वास करने वाले लोगों का प्रमुख त्योहार है, जिसे धूमधाम से मनाया जाता है।
तिथि ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी
आराध्य देव शिव
मान्यता ऐसा माना जाता है कि माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के वरदान स्वरूप इस दिन हुई थी।
संबंधित लेख शिव चालीसा, शिवरात्रि, शिव के अवतार, द्वादश ज्योतिर्लिंग
अन्य जानकारी 'महेश नवमी' के दिन भगवान शंकर और पार्वती की विशेष आराधना की जाती है। समस्त माहेश्वरी समाज इस दिन भगवान शंकर और पार्वती के प्रति पूर्ण भक्ति और आस्था प्रगट करता है।

महेश नवमी ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। यह नवमी माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति का दिन है। माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के वरदान स्वरूप मानी गई है। महेश नवमी 'माहेश्वरी धर्म' में विश्वास करने वाले लोगों का प्रमुख त्योहार है। इस पावन पर्व को हर्षउल्लास व धूमधाम से मनाना प्रत्येक माहेश्वरी का कर्त्तव्य है और समाज उत्थान व एकता के लिए अत्यंत आवश्यक भी है। 'महेश' स्वरूप में आराध्य 'शिव' पृथ्वी से भी ऊपर कोमल कमल पुष्प पर बेलपत्ती, त्रिपुंड्र, त्रिशूल, डमरू के साथ लिंग रूप में शोभायमान होते हैं। भगवान शिव के इस बोध चिह्न के प्रत्येक प्रतीक का अपना महत्व होता है।

माहेश्वरी समाज की उत्त्पत्ति

ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को 'महेश नवमी' या 'महेश जयंती' का उत्सव माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। यह उत्सव 'महेश' यानि शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित है। 'महेश' यानि शंकर, जो त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु, महेश में से एक हैं। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष के नवें दिन भगवान शंकर की कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्त्पत्ति हुई थी।

शिव की कृपा

धर्मग्रंथों के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वज पूर्वकाल में क्षत्रिय वंश के थे। शिकार के दौरान वह ऋषियों के शाप से ग्रसित हुए। किंतु इस दिन भगवान शंकर ने अपनी कृपा से उन्हें शाप से मुक्त कर न केवल पूर्वजों की रक्षा की, बल्कि इस समाज को अपना नाम भी दिया। इसलिए यह समुदाय 'माहेश्वरी' नाम से प्रसिद्ध हुआ। जिसमें 'महेश' यानि शंकर और वारि यानि समुदाय या वंश। भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य या व्यापारिक कार्य को अपनाया। इसलिए आज भी माहेश्वरी समाज वैश्य या व्यापारिक समुदाय के रूप में पहचाना जाता है। माहेश्वरी समाज के 72 उपनामों या गोत्र का संबंध भी इसी प्रसंग से है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हमारा वैश्य समाज (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 05 जून, 2014।
  2. भगवान शिव की महेश नवमी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 05 जून, 2014।

संबंधित लेख

और पढ़ें
"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=महेश_नवमी&oldid=631335" से लिया गया