संगीत  

लोक गीत कलाकार, दिल्ली

संगीत मानवीय लय एवं तालबद्ध अभिव्यक्ति है। भारतीय संगीत अपनी मधुरता, लयबद्धता तथा विविधता के लिए जाना जाता है। वर्तमान भारतीय संगीत का जो रूप दृष्टिगत होता है, वह आधुनिक युग की प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह भारतीय इतिहास के प्रारम्भ के साथ ही जुड़ा हुआ है। वैदिक काल में ही भारतीय संगीत के बीज पड़ चुके थे। सामवेद उन वैदिक ॠचाओं का संग्रह मात्र है, जो गेय हैं। प्राचीन काल से ही ईश्वर आराधना हेतु भजनों के प्रयोग की परम्परा रही है। यहाँ तक की यज्ञादि के अवसर पर भी समूहगान होते थे। ध्यान देने की बात है कि प्राचीन काल की अन्य कलाओं के समान ही भारतीय कला भी धर्म से प्रभावित थी। वास्तव में भारतीय संगीत की उत्पत्ति धार्मिक प्रेरणा से ही हुई है। परन्तु धीरे-धीरे यह धर्म को तोड़कर लौकिक जीवन से संबन्धित होती गई और इसी के साथ नृत्य कला, वाद्य तथा गीतों के नये-नये रूपों का आविष्कार होता गया। कालांतर में नाट्य भी संगीत का एक हिस्सा बन गया। समय के साथ संगीत की विभिन्न धाराएँ विकसित होती गई, नये-नये राग, नये-नये वाद्य यंत्र और नये-नये कलाकार उत्पन्न होते गये। भारतीय संगीत जगत अनेक महान् विभूतियों के योगदानों के परिणामस्वरूप ही इतना विशाल रूप धारण कर सका है।

संगीत क्या है?

इस प्रश्न का उत्तर भारतीय संगीतकारों ने विविध रूप से देने का प्रयास किया है। 'संगीत रत्नाकर' के अनुसार गीतं वाद्य तथा नृत्य त्रयं सगीतमुच्यते - अर्थात् गीत, वाद्य और नृत्य - इन तीनों का समुच्चय ही संगीत है। परन्तु भारतीय संगीत का अध्ययन करने पर यह आभास होता है कि इन तीनों में गीत की ही प्रधानता रही है तथा वाद्य और नृत्य गीत के अनुगामी रहे हैं। एक अन्य परिभाषा के अनुसार, सम्यक् प्रकारेण यद् गीयते तत्संगीतम् - अर्थात् सम्यक् प्रकार से जिसे गाया जा सके वही संगीत है। अन्य शब्दों में स्वर, ताल, शुद्ध, आचरण, हाव-भाव और शुद्ध मुद्रा के गेय विषय ही संगीत है। वास्तव में स्वर और लय ही संगीत का अर्थात् गीत, वाद्य और नृत्य का आधार है।

संगीत की परिभाषा

संगीत वह ललित कला है, जिसमें स्वर और लय के द्वारा हम अपने भावों को प्रकट करते हैं। ललित कला की श्रेणी में 5 कलाएँ आती हैं–संगीत, कविता, चित्रकला, मूर्तिकला और वास्तुकला में मानव भावनाओं को व्यक्त तो करते हैं, परन्तु प्रत्येक में उसका माध्यम बदला करता है। अगर रंग, पैन्सिल, काग़ज़ आदि के द्वारा भावों को व्यक्त करते हैं तो चित्रकला की रचना होती है। इसी प्रकार यदि स्वर-लय के द्वारा अपने भावों को प्रकट करते हैं तो संगीत की रचना होती है।

किवदन्ती

ललित कलाओं में संगीत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस प्रकार संगीत समस्त कलाओं में सर्वश्रेष्ठ हुआ। संगीत का सम्बन्ध देवी-देवताओं से भी जोड़ा गया है। किवदन्ती है कि सर्वप्रथम ब्रह्मा ने सरस्वती देवी को और सरस्वती ने नारद को संगीत की शिक्षा दी। इसके बाद नारद ने भरत को और भरत ने नाट्यशास्त्र द्वारा जन साधारण में संगीत का प्रचार किया। संगीत की

उत्पत्ति में इस प्रकार की मुख्य 7 किवंदन्तियाँ प्रसिद्ध हैं। प्राचीन काल में इन किवंदन्तियों का महत्व शायद रहा भी हो, किन्तु आज के वैज्ञानिक युग में इनका विशेष महत्व नहीं है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. संगीत रत्नाकर 1|24-25

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