कल्कि अवतार  

संक्षिप्त परिचय
कल्कि अवतार
कल्कि का अवतार ताम्रचित्र
अवतार भगवान विष्णु के दस अवतारों में अंतिम अवतार
धर्म-संप्रदाय हिंदू धर्म
परिजन पिता- विष्णुयश और माता- सुमति
गुरु याज्ञवलक्य जी पुरोहित और भगवान परशुराम
विवाह लक्ष्मी रूपी पद्मा और वैष्णवी शक्ति रूपी रमा
संतान जय, विजय, मेघमाल तथा बलाहक
अन्य विवरण धर्म ग्रंथों के अनुसार 'कल्कि अवतार' अभी प्रकट होने वाला है।

कल्कि अवतार को विष्णु का भावी और अंतिम अवतार माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पृथ्वी पर पाप की सीमा पार होने लगेगी, तब दुष्टों के संहार के लिए विष्णु का यह अवतार प्रकट होगा। अपने माता-पिता की पांचवीं संतान कल्कि यथासमय देवदत्त नाम के घोड़े पर आरूढ़ होकर तलवार से दुष्टों का संहार करेंगे। तब सतयुग का प्रारंभ होगा।

कथा

युग परिवर्तनकारी भगवान श्रीकल्कि के अवतार का प्रयोजन विश्वकल्याण बताया गया है। भगवान का यह अवतार ‘‘निष्कलंक भगवान’’ के नाम से भी जाना जायेगा। श्रीमद्भागवतपुराण में विष्णु के अवतारों की कथाएँ विस्तार से वर्णित है। इसके बारहवें स्कन्ध के द्वितीय अध्याय में भगवान के कल्कि अवतार की कथा विस्तार से दी गई है जिसमें यह कहा गया है कि सम्भल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के पुत्र के रूप में भगवान कल्कि का जन्म होगा। वह देवदत्त नाम के घोड़े पर आरूढ़ होकर अपनी कराल करवाल (तलवार) से दुष्टों का संहार करेंगे तभी सतयुग का प्रारम्भ होगा।

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  1. भगवान कल्कि अवतार (हिंदी) www.mahashakti.org.in। अभिगमन तिथि: 28 जुलाई, 2017।
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