सिक्ख  

सिक्ख धर्म का प्रतीक

सिक्ख लोगों को गुरु नानक (1469-1539 ई.) के अनुयायियों के रूप में जाना जाता है। मुख्य रूप से पंजाब ही उनका निवास स्थान है। प्रारम्भ में वे शान्तिप्रिय थे और उनमें परस्पर जाति-पाँति का कोई भेदभाव नहीं था, हालाँकि उनमें से अधिकांश हिन्दू से सिक्ख बने थे। ये सभी धर्मों में निहित आधारभूत सत्य में विश्वास करते हैं और उनका दृष्टिकोण धार्मिक अथवा साम्प्रदायिक पक्षपात से रहित और उदार है। 1539 ई. में गुरु नानक की मृत्यु के उपरान्त सिक्खों का मुखिया 'गुरु' कहलाने लगा। सिक्खों ने भारत में समय-समय पर यहाँ के इतिहास में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। मुग़ल काल में कितने ही सिक्ख राजाओं ने अपने पुत्रों को देश की ख़ातिर बलिदान कर दिया। औरंगज़ेब ने तो सिक्खों के प्रति कठोर दृष्टिकोण अपनाया। बन्दा बहादुर आज भी भारतीय इतिहास में अपनी शहादत के लिए याद किया जाता है।

इतिहास

15वीं शताब्दी में सिक्ख धर्म 'गुरु नानकदेव' के द्वारा चलाया गया। सिक्ख जाति को एक लड़ाकू जाति के रूप में परिवर्तित करने का महत्त्वपूरण कार्य गुरु हर गोविन्द सिंह ने किया। सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह के नेतृत्व में सिक्ख एक राजनीतिक एवं फ़ौजी शक्ति बनकर उभरे। गुरु गोविन्द सिंह की मृत्यु के बाद 'गुरु' की परम्परा समाप्त हो गई। उनके शिष्य बन्दा सिंह, जिसे 'बन्दा बहादुर' के नाम से भी जाना जाता है, उसने अपने गुरु की मृत्यु के बाद सिक्खों का नेतृत्व संभाला। उसके शिष्य उसे 'सच्चा पादशाह' कहकर सम्बोधित करते थे। 1715 ई. में बन्दा सिंह को पकड़कर उसकी हत्या कर दी गई। 1748 ई. में नवाब 'कर्पूर सिंह' ने सिक्खों के अलग-अलग दल को 'खालसा दल' में शामिल किया, जिसका नेतृत्व 'जस्सा सिंह' ने किया। सिक्खों का विभाजन 12 मिसलों में हुआ था। 1760 ई. तक सिक्खों का पंजाब पर पूर्ण अधिकार हो गया था। सिक्खों ने 1763 से 1773 ई. के बीच सिक्ख शक्ति का विस्तार पूर्व में सहारनपुर, पश्चिम में अटक, दक्षिण में मुल्तान और उत्तर में जम्मू-कश्मीर तक कर लिया।

सिक्खों के दस गुरु
गुरु का नाम समयकाल
गुरु नानकदेव 1469-1539
गुरु अंगद 1539-1552 ई.
गुरु अमरदास 1552-1574 ई.
गुरु रामदास 1574-1581 ई.
गुरु अर्जुन 1581-1606 ई.
गुरु हरगोविंद सिंह 1606-1645 ई.
गुरु हरराय 1645-1661 ई.
गुरु हरकिशन 1661-1664 ई.
गुरु तेग बहादुर सिंह 1664-1675 ई.
गुरु गोविन्द सिंह 1675-1708 ई.

टीका टिप्पणी और संदर्भ

भट्टाचार्य, सच्चिदानन्द भारतीय इतिहास कोश, द्वितीय संस्करण-1989 (हिन्दी), भारत डिस्कवरी पुस्तकालय: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, 472।

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