सांकाश्य  

सांकाश्य
बुद्ध धर्म स्तम्भ, संकिसा
विवरण गौतम बुद्ध के जीवन काल में सांकाश्य ख्याति प्राप्त नगर था। पाली कथाओं के अनुसार यहीं बुद्ध त्रयस्त्रिंश स्वर्ग से अवतरित होकर आए थे। महाभारत काल में सांकाश्य की स्थिति पूर्व पंचाल देश में थी और यह नगर पंचाल की राजधानी कांपिल्य से अधिक दूर नहीं था।
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला एटा ज़िला
प्रसिद्धि चीनी यात्री युवानच्वांग ने सांकाश्य का नाम 'कपित्थ' भी लिखा है। संकिसा के उत्तर की ओर एक स्थान 'कारेवर' तथा 'नागताल' नाम से प्रसिद्ध हैं।
अन्य जानकारी जैन मतावलंबी सांकाश्य को तेरहवें तीर्थंकर विमलनाथ की ज्ञान-प्राप्ति का स्थान मानते हैं। यह ग्राम आजकल एक ऊँचे टीले पर स्थित है।

सांकाश्य अथवा 'संकश्या' प्राचीन भारत में पंचाल जनपद का प्रसिद्ध बौद्ध कालीन नगर, जो वर्तमान 'बसंतपुर' (ज़िला एटा, उत्तर प्रदेश) है। यह फ़र्रुख़ाबाद के निकट स्थित है। सांकाश्य का सर्वप्रथम उल्लेख संभवत: वाल्मीकि रामायण[1] में है।

सुधन्वा का वध

यहाँ सांकाश्य नरेश 'सुधन्वा' का जनक की राजधानी मिथिला पर आक्रमण करने का उल्लेख है। सुधन्वा सीता से विवाह करने का इच्छुक था। जनक के साथ युद्ध में सुधन्वा मारा गया तथा सांकाश्य के राज्य का शासक जनक ने अपने भाई कुशध्वज को बना दिया। उर्मिला इन्हीं कुशध्वज की पुत्री थी-

'कस्यचित्त्वथ कालस्य सांकाश्यादागत: पुरात्, सुधन्व्रा वीर्यवान् राजा मिथिलामवरोधक:। निहत्य तं मुनिश्रेष्ठ सुधन्वानं नराधिपम् सांकाश्ये भ्रातरं शूरमभ्यषिञ्चं कुशध्वजम्।'

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. वाल्मीकि आदि. 71, 16-19
  2. पाली कथाओं 4,2,80

बाहरी कड़ियाँ

अभिशप्त बौद्धनगर

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