अहिच्छत्र  

अहिच्छत्र अथवा अहिक्षेत्र उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले की आँवला तहसील में स्थित है। दिल्ली से अलीगढ़ 126 कि.मी. तथा अलीगढ़ से बरेली रेलमार्ग पर[1] आँवला स्टेशन 135 कि.मी. है। आँवला स्टेशन से अहिच्छत्र क्षेत्र सड़क द्वारा 18 कि.मी. है। आँवला से अहिच्छत्र तक पक्की सड़क है।

प्राचीनता

  • आँवला नामक स्थान के निकट इस महाभारतकालीन नगर के विस्तीर्ण खंडहर अवस्थित हैं। यह नगर महाभारत काल में तथा उसके पश्चात् पूर्व बौद्ध काल में भी काफ़ी प्रसिद्ध था। यहाँ उत्तरी पांचाल की राजधानी थी।[2]

'सोऽध्यावसद्दीनमना: काम्पिल्यं च पुरोत्तमम्।
दक्षिणांश्चापि पंचालान् यावच्चर्मण्वती नदी।
द्रोणेन चैव द्रुपदं परिभूयाथ पातित:।
पुत्रजन्म परीप्सन् वै पृथिवीमन्वसंचरत्,
अहिच्छत्रं च विषयं द्रोण: समभिपद्यत'।[3]

उपरोक्त उद्धरण से सूचित होता है कि द्रोणाचार्य ने पांचाल नरेश द्रुपद को हरा कर दक्षिण पांचाल का राज्य उसके पास छोड़ दिया था और अहिच्छत्र नामक राज्य अपने अधिकार में कर लिया था। अहिच्छत्र कुरुदेश के पार्श्व में ही स्थित था-

'अहिच्छत्रं कालकूटं गंगाकूलं च भारत'।
  • अहिच्छत्र उत्तर पांचाल देश का ही एक नाम था। यहां के राजा द्रुपद (द्रौपदी के पिता) थे। जब द्रोण महर्षि अग्निवेश के यहां पढ़ते थे तो द्रुपद भी इनके सहपाठी थे। द्रोण ने किरीट को पराजित कर द्रुपद को राज्य दिलवाया था, जिससे प्रसन्न होकर इन्होंने द्रोण को आधा राज्य देने की शपथ कर प्रतिज्ञा भी की थी कि जो द्रुपद के पास ही न्यास स्वरूप द्रोण ने उस समय छोड़ दिया था। शिक्षा समाप्त कर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए जब द्रुपद से द्रोण ने आधा राज्य मांगा तो उसने उन्हें अपमानित कर वापस लौटा दिया। पांडवों को शिक्षा दे उनकी ही सहायता से द्रोणाचार्य ने गुरु दक्षिणा में द्रुपद से वचन दिया हुआ आधा राज्य छीना था। वह आधा छीना हुआ राज्य ही अहिच्छत्र था, जिसकी राजधानी रामनगर (रूहेलखंड) थी।[4]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. चन्दौसी से आगे
  2. ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 57 |
  3. महाभारत आदिपर्व, 137, 73-74-76
  4. पौराणिक कोश |लेखक: राणा प्रसाद शर्मा |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 556, परिशिष्ट 'क' |
  5. शतपथ ब्राह्मण, 13, 5, 4, 7
  6. वैदिक इंडेक्स 1,494
  7. संख्यावती
  8. एंशेंट जैन हिम्स पृ. 56
  9. ए क्लासिकल डिक्शनरी ऑफ़ हिन्दू माइथोलॉजी एण्ड रिलीजन, ज्योग्रेफी, हिस्ट्री एण्ड लिटरेचर-सप्तम संस्करण
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