शेरशाह सूरी  

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शेरशाह सूरी
शेरशाह सूरी
पूरा नाम शेरशाह सूरी
अन्य नाम फ़रीद ख़ाँ, शेर ख़ाँ
जन्म सन् 1485-86[1] या 1472[2]
जन्म भूमि हिसार, फ़िरोजा, हरियाणा[1] अथवा सासाराम, बिहार[2]
मृत्यु तिथि 22 मई, 1545
मृत्यु स्थान बुन्देलखण्ड
पिता/माता हसन ख़ाँ
संतान जलाल ख़ाँ (इस्लामशाह सूरी)
उपाधि शेरशाह
राज्य सीमा उत्तर मध्य भारत
शासन काल 17 मई 1540 - 22 मई 1545
शा. अवधि 5 वर्ष
राज्याभिषेक 17 मई 1540
धार्मिक मान्यता इस्लाम धर्म
युद्ध चौसा का युद्ध, बिलग्राम की लड़ाई
पूर्वाधिकारी हुमायूँ
उत्तराधिकारी इस्लामशाह सूरी
वंश सूर वंश
मक़बरा शेरशाह का मक़बरा
संबंधित लेख शेरशाह सूरी साम्राज्य
अन्य जानकारी शेरशाह सूरी, पहला मुस्लिम शासक था, जिसने यातायात की उत्तम व्यवस्था की और यात्रियों एवं व्यापारियों की सुरक्षा का संतोषजनक प्रबंध किया।

शेरशाह सूरी (अंग्रेज़ी: Sher Shah Suri, जन्म: 1485-86 हिसार[1] अथवा 1472 सासाराम[2] - मृत्यु: 22 मई 1545 बुन्देलखण्ड) का वास्तविक नाम 'फ़रीद ख़ाँ' था। शेरशाह सूरी का भारत के इतिहास में विशेष स्थान है। शेरशाह, सूर साम्राज्य का संस्थापक था। इसके पिता का नाम हसन खाँ था। शेरशाह को शेर ख़ाँ के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों का कहना है कि अपने समय में अत्यंत दूरदर्शी और विशिष्ट सूझबूझ का आदमी था। इसकी विशेषता इसलिए अधिक उल्लेखनीय है कि वह एक साधारण जागीदार का उपेक्षित बालक था। उसने अपनी वीरता, अदम्य साहस और परिश्रम के बल पर दिल्ली के सिंहासन पर क़ब्ज़ा किया था।

जन्म और बचपन

शेरशाह सूरी के जन्म तिथि और जन्म स्थान के विषय में इतिहासकारों में मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों ने इसका जन्म सन् 1485-86, हिसार, फ़िरोजा हरियाणा[1] में और कुछ सन् 1472, सासाराम बिहार[2] में बतलाया है। इब्राहिम ख़ाँ के पौत्र और हसन के प्रथम पुत्र फ़रीद (शेरशाह) के जन्म की तिथि अंग्रेज़ इतिहासकार ने सन् 1485-1486 बताई है। शेरशाह सूरी पर विशेष खोज करने वाले भारतीय विद्वान श्री कालिका रंजन क़ानूनगो ने भी फ़रीद का जन्म सन् 1486 माना है। हसन ख़ाँ के आठ लड़के थे। फ़रीद ख़ाँ और निज़ाम ख़ाँ एक ही अफ़ग़ान माता से पैदा हुए थे। अली और यूसुफ एक माता से। ख़ुर्रम (कुछ ग्रंथों में यह नाम मुदहिर है) और शाखी ख़ाँ एक अन्य माँ से और सुलेमान और अहमद चौथी माँ से उत्पन्न हुए थे। फ़रीद की माँ बड़ी सीधी-सादी, सहनशील और बुद्धिमान थी। फ़रीद के पिता ने इस विवाहिता पत्नी के अतिरिक्त अन्य तीन दासियों को हरम में रख लिया था। बाद में इन्हें पत्नी का स्थान प्राप्त हुआ। फ़रीद और निज़ाम के अतिरिक्त शेष छह पुत्र इन्हीं की संतान थे। कुछ समय बाद हसन ख़ाँ, फ़रीद और निज़ाम की माँ से उदासीन और दासियों के प्रति आसक्त रहने लगा। वह सुलेमान और अहमद ख़ाँ की माँ के प्रति विशेष आसक्त था। वह इसे अधिक चाहने लगा था। हसन की यह चहेती (सुलेमान और अहमद ख़ाँ की माँ) फ़रीद और निज़ाम की माँ से जलती थी, क्योंकि सबसे बड़ा होने के कारण फ़रीद जागीर का हकदार था। इस परिस्थिति में फ़रीद का दुखी होना स्वाभाविक ही था। पिता उसकी ओर से उदासीन रहने लगा।[3]

बुलंद हौसला

फ़रीद ख़ाँ बचपन से ही बड़े हौसले वाला इंसान था। उसने अपने पिता से आग्रह किया कि मुझे अपने मसनदेआली उमर खान के पास ले चलिये और प्रार्थना कीजिये कि वह मुझे मेरे योग्य कोई काम दें। पिता ने पुत्र की बात यह कहकर टाल दी कि अभी तुम बच्चे हो। बड़े होने पर तुम्हें ले चलूंगा। किंतु फ़रीद ने अपनी माँ से आग्रह किया और अपने पिता को इस बात के लिए राजी किया। हसन, फ़रीद को उमर खान के पास ले गया। उमर खान ने कहा कि बड़ा होने पर इसे मैं कोई न कोई काम दूंगा, किंतु अभी इसे महाबली (इसका दूसरा नाम हनी है) ग्राम का बलहू नामक भाग जागीर के रूप में देता हूँ। फ़रीद ने बड़ी प्रसन्नता से अपनी माँ को इसकी सूचना दी।[3]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 तारीखे खान जहान लोदी के अनुसार
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 banglapedia
  3. 3.0 3.1 3.2 3.3 पुस्तक संदर्भ 'शेरशाह सूरी' लेखक 'विद्या भास्कर' पेज- 2-5
  4. पुस्तक संदर्भ 'शेरशाह सूरी' लेखक 'विद्या भास्कर'
  5. वर्तमान में ज़िला है।
  6. शेरशाह सूरी : एक महान् राष्ट्र निर्माता (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 5मई, 2011।
  7. शेरशाह सूरी : एक महान् राष्ट्र निर्माता (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 5मई, 2011।

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