राजवल्लभ सेन  

राजवल्लभ सेन (1698-1763 ई.) प्लासी के युद्ध के समय बंगाल के प्रभावशाली व्यक्तियों में गिना जाता था। इसका जन्म बंगाल के फ़रीदपुर ज़िले के एक वैद्य परिवार में हुआ था।

सिराजुद्दौला का विरोधी

अपनी योग्यता के बल पर राजवल्लभ सेन बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की चाची घसीटी बेगम का दीवान हो गया था। नवाब अलीवर्दी ख़ाँ ने उसको राजा की उपाधि दी, परन्तु इन उपकारों को भुला करके वह अलीवर्दी ख़ाँ के पौत्र एवं उत्तराधिकारी सिराजुद्दौला का विरोधी बन गया और मीरजाफ़र तथा कुछ असंतुष्ट पदाधिकारियों सहित नवाब के ख़िलाफ़ अंग्रेज़ों के षड्यंत्र में सम्मिलित हो गया। उसका पुत्र कृष्णदास बंगाल के नवाब की सेवा में नियुक्त था।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय इतिहास कोश |लेखक: सच्चिदानन्द भट्टाचार्य |प्रकाशक: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान |पृष्ठ संख्या: 401 |

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