रणजीत सिंह  

रणजीत सिंह
रणजीत सिंह
पूरा नाम महाराणा रणजीत सिंह
अन्य नाम 'शेरे पंजाब'
जन्म 13 नवम्बर, 1780
जन्म भूमि गुजरांवाला
मृत्यु तिथि 27 जून, 1839
मृत्यु स्थान लाहौर
पिता/माता पिता- महासिंह
पति/पत्नी ज़िन्दाँ रानी[1]
संतान दिलीप सिंह
उपाधि महाराणा
शासन काल 1801-1839
प्रशासन रणजीत सिंह का प्रशासन भी महत्त्वपूर्ण रहा। वह निरंकुश होते हुए भी 'खालसा' के नाम पर शासन करते थे। उनकी सरकार को 'सरकार खालसा' कहा जाता था।
अन्य जानकारी एक फ़्राँसीसी पर्यटक 'विक्टर जैकोमाण्ट' ने रणजीत सिंह की तुलना नेपोलियन बोनापार्ट से की है।

रणजीत सिंह (अंग्रेज़ी: Ranjit Singh, जन्म: 13 नवम्बर, 1780, गुजरांवाला; मृत्यु: 27 जून, 1839, लाहौर) सिक्ख साम्राज्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा थे। वे "शेर-ए पंजाब" के नाम से प्रसिद्ध हैं। महाराजा रणजीत सिंह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रूप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीवित रहते हुए अंग्रेज़ों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं फटकने दिया। 12 अप्रैल, सन 1801 को रणजीत सिंह ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की थी। गुरु नानक के एक वंशज ने उनकी ताजपोशी संपन्न कराई थी। उन्होंने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया और 1802 में अमृतसर की ओर रूख किया। ब्रिटिश इतिहासकार जे. टी. व्हीलर के अनुसार "अगर वह एक पीढ़ी पुराने होते, तो पूरे हिंदूस्तान को ही फ़तेह कर लेते।" महाराजा रणजीत सिंह पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और कला को बहुत प्रोत्साहन दिया। उन्होंने पंजाब में क़ानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी भी किसी को सज़ा-ए-मौत नहीं दी।

परिचय

महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवम्बर, सन 1780 को बदरूख़ाँ या गुजरांवाला, भारत में हुआ था। वे पंजाब के सिक्ख राज्य के संस्थापक और महाराज (1801-1839 ई.) थे। रणजीत सिंह सिक्खों की बारह मिसलों में से एक 'सुकर चाकिया' से सम्बन्धित थे। उन्होंने 1797 ई. में रावी नदी एवं चिनाब नदी के प्रदेशों के प्रशासन का कार्यभार संभाला था। उनके पिता महासिंह सुकर चाकिया मिसल के मुखिया थे। जिस समय रणजीत सिंह की आयु केवल 12 वर्ष थी, उसी समय उनके पिता का देहान्त हो गया और बाल्यावस्था में ही वह सिक्ख मिसलों के एक छोटे से समूह के सरदार बना दिये गए। 15 वर्ष की आयु में 'कन्हया मिसल' के सरदार की बेटी से उनका विवाह हुआ और कई वर्ष तक उनके क्रिया-कलाप उनकी महत्त्वाकांक्षी विधवा सास सदाकौर द्वारा ही निर्देशित होते रहे। नक्कइयों की बेटी के साथ दूसरे विवाह ने रणजीत सिंह को सिक्ख रजवाड़ों (सामन्तों) के बीच महत्त्वपूर्ण बना दिया। ज़िन्दाँ रानी रणजीत सिंह की पाँचवी रानी तथा उनके सबसे छोटे बेटे दलीप सिंह की माँ थीं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. रणजीत सिंह की पाँचवी रानी
  2. इस सिक्ख राजा की चालाकी से भारत आया था कोहिनूर (हिन्दी) firkee.in। अभिगमन तिथि: 22 मार्च, 2017।
  3. शाहशुजा अहमदशाह अब्दाली का ही वंशज था, जिसे यह हीरा शाहरूख़ मिर्ज़ा ने दिया था, तब से यह अब्दाली के वंशजों के पास ही था।
  4. रणजीत सिंह के विजय अभियान (हिन्दी) gajabkhabar.com। अभिगमन तिथि: 19 मार्च, 2017।
  5. शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की जीवनी (हिन्दी) nayichetana.com। अभिगमन तिथि: 22 मार्च, 2017।

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