कोनेरू हम्पी  

कोनेरू हम्पी
कोनेरू हम्पी
पूरा नाम कोनेरू हम्पी
जन्म 31 मार्च 1987
जन्म भूमि विजयवाड़ा, आन्ध्र प्रदेश
अभिभावक कोनेरू अशोक और कोनेरू लता
खेल-क्षेत्र शतरंज
विद्यालय रेजीडेशिंयल स्कूल, गुंटूर
पुरस्कार-उपाधि अर्जुन पुरस्कार, पद्म श्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी भारत की एकमात्र महिला शतरंज खिलाड़ी होने के अतिरिक्त पुरुषों का ग्रैंडमास्टर नाम भी पा चुकी हैं।
अद्यतन‎

कोनेरू हम्पी (अंग्रेज़ी: Koneru Humpy, जन्म: 31 मार्च 1987) 9 वर्ष की उम्र में कोनेरू हम्पी ने राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर अपने खिलाड़ी जीवन की बेहतरीन शुरुआत कर दी। वह महिला ग्रैंड मास्टर का खिताब भी पा चुकी हैं। 1996 में 9 वर्ष से कम आयु वर्ग की लड़कियों की राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में मुम्बई में हम्पी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। उसके पश्चात् 1997 में दस वर्ष से कम आयु वर्ग की लड़कियों की राष्ट्रीय रैपिड शतरंज चैंपियनशिप में चेन्नई में उसने स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

जीवन परिचय

कोनेरू हम्पी की शिक्षा चलपथी रेजीडेशिंयल स्कूल, गुंटूर में हुई। उसकी माता का नाम कोनेरू लता है तथा बहन का नाम कोनेरू चन्द्र हासा है। अशोक ने अपनी बेटी का नाम हम्पी इसलिए रखा क्योंकि इसका एक विदेशी भाषा में अर्थ होता है 'चैम्पियन'। इसके पीछे उसकी अपनी एक इच्छा और एक दृष्टिकोण था कि उसकी बेटी बड़ी होकर विश्व चैम्पियन बनेगी और उसके अधूरे सपनों को पूरा करेगी। बाद में उसने नाम की स्पेलिंग को बदल (Humpi) कर दिया ताकि वह रूसी नाम जैसा प्रतीत हो। कुछ वर्षों पहले जब कोनेरू के पिता अशोक व माँ लता ने अपने मध्यवर्गीय जीवन में एक टेलीविज़न के स्थान पर कम्प्यूटर ख़रीदा तो सभी ने उनका खूब मज़ाक उड़ाया। हम्पी की माँ लता को आज भी याद है कि हमारे कप्यूटर ख़रीदने के निर्णय की लोगों ने किस तरह हँसी उड़ाई थी लेकिन आज जब कोनेरू विश्व चैंम्पियन बन गई है तो माता-पिता को दूसरों के दृष्टिकोण पर हँसी आती है। जब हम्पी मात्र 5 वर्ष की थी तब शतरंज के मोहरों व उनकी चालों की जानकारी उसे दी जाने लगी थी। एक बार जब अशोक शतरंज खेल रहे थे तब 6 वर्षीय हम्पी ने एक चाल बताई। अशोक हैरान रह गए कि वह चाल एक-दम सटीक थी। फिर उन्होंने उसकी प्रतिभा को कई बार जाँचने की कोशिश की, वह अधिकांशतः सही थी। तब अशोक ने हम्पी की रुचि देखते हुए उसकी कोचिंग आरम्भ कर दी। उसके साथ वह अन्य 10 बालकों को भी कोचिंग दिया करते थे। तब 9 वर्ष की छोटी सी अवस्था में कोनेरू 1996 में राष्ट्रीय चैम्पियन बनी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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