लिएंडर पेस  

लिएंडर पेस
लिएंडर पेस
पूरा नाम लिएंडर पेस
जन्म 17 जून, 1973
जन्म भूमि गोवा
अभिभावक पिता- डॉ. वैस अगापितो पेस, माता-जेनिफर पेस
कर्म भूमि भारत
खेल-क्षेत्र टेनिस
पुरस्कार-उपाधि ‘राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार’ (1996), ‘पद्म श्री’ (2001), ओलंपिक में ‘कांस्य पदक’ (1996)
प्रसिद्धि भारतीय टेनिस खिलाड़ी
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख महेश भूपति, सानिया मिर्जा
अन्य जानकारी लिएंडर पेस ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति 1990 में अर्जित की जब उन्होंने विंबलडन जूनियर का खिताब जीता और जूनियर विश्व रैंकिंग में नम्बर एक खिलाड़ी बन गए।

लिएंडर पेस (अंग्रेज़ी: Leander Paes, जन्म- 17 जून, 1973, गोवा) भारतीय टेनिस खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीत कर भारत का ओलंपिक में पदक का रास्ता खोला था। उस वक्त लिएंडर ने व्यक्तिगत खेलों में भारत के लिए 44 साल पड़े सूखे को समाप्त किया था। ओलंपिक के लिहाज से लिएंडर पेस का प्रदर्शन एक मील का पत्थर है। 1996 में लिएंडर पेस को उनके टेनिस में उत्तम प्रदर्शन के लिए '‘राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार’ तथा 2001 को महेश भूपति के साथ ‘पद्म श्री’ सम्मान प्रदान किया गया।

परिचय

लिएंडर पेस का जन्म 17 जून, 1973 को गोवा में हुआ था। यह पुरुष डबल्स तथा मिक्सड डबल्स के सर्वाधिक सफल खिलाड़ियों में से एक हैं। लिएंडर का पालन-पोषण कलकत्ता में हुआ था। उनकी माँ जेनिफर पेस 1980 में भारतीय बास्केट बॉल टीम की कैप्टेन थी और उनके पिता डा. वैस अगापितो पेस हॉकी के मिड-फील्डर थे और 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय टीम के सदस्य थे, जिसने कांस्य पदक जीता था। लिएंडर को टेनिस के अतिरिक्त गोल्फ़ खेलने का भी शौक है। उनकी स्कूली शिक्षा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, हायर सेकेंड्री स्कूल से हुई। उसका निवास स्थान भारत में कलकत्ता तथा अमेरिका के फ्लोरिडा में ऑरलेन्डो है। लिएंडर ने 7 वर्ष की आयु में टेनिस सीखना आरम्भ कर दिया था और खेल की बेसिक जानकारी साउथ क्लब, कलकत्ता से आरम्भ की थी।

ब्रिटेनिया टेनिस एकेडेमी

उन्होंने 1985 में मद्रास की ब्रिटेनिया टेनिस एकेडेमी में प्रशिक्षण आरम्भ कर दिया और उनकी कोचिंग दबे-ओ-मियरा ने की। पेस ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति 1990 में अर्जित की जब उन्होंने विंबलडन जूनियर का खिताब जीता और जूनियर विश्व रैंकिंग में नम्बर एक खिलाड़ी बन गए।

राइस बाउल चैंपियनशिप
लिएंडर पेस

इसके पूर्व 14 वर्ष से कम आयु वर्ग की राइस बाउल चैंपियनशिप उन्होंने 1987 में हांगकांग में जीती। 2 वर्ष बाद 16 से कम आयु वर्ग की प्रतियोगिता भी उन्होंने जीती। उन्होंने जूनियर व सीनियर राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब भी हासिल किया।

जब पूरी दुनिया के शीर्ष-खिलाड़ी डेविस कप के नाम पर नाक-भौं सिकोड़ते हैं तब लिएंडर ने दिखाया कि अपने देश के लिए खेलना कितने गर्व की बात है। उन्हें सर्किट के डबल्स खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है।

पेस-भूपति की जोड़ी

डबल्स में लिएंडर ने महेश भूपति के साथ खेल कर इस जोड़ी को भी एक नम्बर का रैंक हासिल करवाया। 1991 में वह प्रोफेशनल खिलाड़ी बन गया। वैसे लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी की कहानी एक रोलर-कोस्टर की भांति है जिसमें बार-बार उतार-चढ़ाव आते हैं यानी इस जोड़ी का मिलन और अलगाव अनेकों बार हो चुका है। यूं तो भारतीय मीडिया और दर्शक क्रिकेट से ही जुड़ा रहना ज्यादा पसन्द करते हैं और अन्य खेलों को कम तरजीह देते हैं परन्तु फिर भी किसी अन्य खेल सम्बन्धी समाचार को प्रमुखता से देखा जाता है तो वह है लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी का खेल।

इन दोनों की जोडी ने सर्वप्रथम अक्टूबर 1994 में साथ-साथ जकार्ता चैलेंजर खेला। अटलांटा ओलंपिक, 1996 में दूसरे दौर में यह जोड़ी हार गई। उसी वर्ष इस जोड़ी ने डेविस कप में अपनी उपस्थिति का एहसास कराया। 1997 तक इस जोड़ी ने खेल की ऊंचाइयों को छुआ। लेकिन 1996 के ओलंपिक में एकल स्पर्धा में कांस्य पदक प्राप्त कर भारत को प्रथम बार एकल पदक दिलाया। जब यह जोड़ी बनी तो इस पदक व डेविस कप के कारण लिएंडर सीनियर खिलाड़ी थे। लेकिन जोड़ी के रूप में खेलने पर सीनियर व जूनियर जैसी चीज नहीं रह जाती। इससे पूर्व लिएंडर ने अन्य अनेक खिलाड़ियों के साथ भी जोड़ी बनाने का प्रयास किया था।

1997 से 2002 के बीच इस जोड़ी ने 22 टाइटल जीते जिसमें पुरुष डबल्स के तीन ग्रैड स्लैम शामिल हैं। 1999 का फ्रेच ओपन और विंबलडन इस जोड़ी ने जीता। 2001 का विबंलडन भी इनमें महत्वपूर्ण है। किसी अन्य जोड़ी ने ऐसी शानदार सफलता प्राप्त नहीं की है।

हालांकि अनेक बार इन दोनों खिलाड़ियों के बीच मतभेद उभरे हैं और उन्होंने साथ-साथ न खेलने का फैसला किया है। वर्ष 2002 में उनके बीच दरार आई और अप्रैल में उन्होंने साथ न खेलने का निर्णय लिया। प्रोफेशनल टेनिस में अलगाव हो जाने पर भी उन दोनों ने बुसान एशियाई खेलों में जोड़ी के रूप में खेलकर शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक जीता।

2003 में लिएंडर ने अन्य खिलाड़ियों के साथ जोड़ी बनाने का प्रयास किया लेकिन फिर डेविस कप के लिए लिएंडर और महेश भूपति ने जोड़ी बनाई।[1]

इस प्रकार के अनेक मुकाबले जीतने पर लिएंडर को अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर अनेक बार स्थान मिला जो भारत में अत्यन्त महत्वपूर्ण है वरना केवल क्रिकेट खिलाड़ियों को ही समाचार आकर्षण बनने का मौका मिलता है। फ्रेंच ओपन जीतने पर पेस व भूपति को लगभग एक करोड़ इकत्तीस लाख रुपये की इनामी रकम भी मिली। लेकिन इन सबसे और फ्रेंच ओपन से भी ज्यादा विंबलडन विजेता होने का गौरव मिला।

पेस और भूपति की जोड़ी राष्ट्र के गर्व और प्रशंसा की हकदार मानी गई है। राष्ट्रपति से लेकर आम नागरिक तक सभी ने उन्हें बधाई दी और उन्हें आश्वस्त किया कि वे भारतीयों के लिए गौरव और गर्व के महानायक हैं।

फरवरी 2004 में लिएंडर पेस ने दूसरा और अंतिम उलट एकल जीतने के साथ भारत को डेविस कप एशिया ओशियाना ग्रुप टेनिस में मेजबान न्यूजीलैंड पर 3-2 से विजय हासिल करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लिएंडर को टेनिस के अतिरिक्त गोल्फ़ खेलने का भी शौक है। उसने 2002 में एक साक्षात्कार में बताया– “मुझे आस्ट्रेलियन टेनिस कोच, बॉब कार्मीकील मिला, जो बड़ा गोल्फ़ खिलाड़ी है। उसने मुझे गोल्फ़ से 6 वर्ष पूर्व जोड़ा।”

लिएंडर का मानना है कि टेनिस और गोल्फ़ में अनेक समानताएं हैं। गोल्फ़ ने मुझे धैर्य रखना सिखाया है। लिएंडर बताते हैं- ”खिलाड़ियों के परिवार से संबद्ध होने के कारण मैं सभी खेल रुचि के साथ खेलता हूँ। डी.एल.एफ का गोल्फ कोर्स मेरा पंसदीदा गोल्फ़ कोर्स है ।”

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. लिएंडर पेस का जीवन परिचय (हिंदी) कैसे और क्या। अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर, 2016।
  2. लगभग एक करोड़ 11 लाख 85 हजार रुपये
  3. लगभग 47 लाख 50 हजार 800 रुपये
  4. लगभग 1 करोड़ 10 लाख रुपये

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