पुलेला गोपीचंद  

पुलेला गोपीचंद
पुलेला गोपीचंद
पूरा नाम पुलेला गोपीचंद
जन्म 16 नवम्बर, 1973
जन्म भूमि प्रकाशम, आन्ध्र प्रदेश
खेल-क्षेत्र बैडमिंटन
पुरस्कार-उपाधि राजीव गाँधी खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, पद्म श्री
नागरिकता भारतीय
अद्यतन‎

पुलेला गोपीचंद (अंग्रेज़ी:Pullela Gopichand, जन्म: 16 नवम्बर, 1973) एक प्रसिद्ध भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। 11 मार्च 2001 को ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत कर भारत के स्टार शटलर पुलेला गोपीचंद ने भारतीय खेल जगत् में एक नया इतिहास लिख डाला। इनसे 21 वर्ष पूर्व प्रकाश पादुकोने ने भारत में बैडमिंटन की ऊँचाइयों को छुआ था।

जीवन परिचय

गोपीचंद की आरम्भिक शिक्षा हैदराबाद के सेंट पॉल स्कूल में हुई तथा ए.वी कॉलेज से उसने स्नातक परीक्षा पास की। फिर उसने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री प्राप्त की। पुलेला ने प्रथम मैच 12 वर्ष की उम्र में दिल्ली में आयोजित 'राष्ट्रीय प्रतिभा खोज कार्यक्रम' में जीता। फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

खेल जीवन

पुलेला गोपीचंद ने 1991 से देश के लिए खेलना आरम्भ किया जब उनका चुनाव मलेशिया के विरुद्ध खेलने के लिए किया गया। उसके पश्चात् तीन बार (1998-2000) 'थामस कप' में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अनेक बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है। उसने अनेक टूर्नामेंट में विजय हासिल कर भारत को गौरवांवित किया है। उसने 1996 में विजयवाड़ा के सार्क टूर्नामेंट में तथा 1997 में कोलम्बो में स्वर्ण पदक प्राप्त किए। कामनवेल्थ खेलों में कड़े मुक़ाबलों के बीच रजत व कांस्य पदक भारत को दिलाए। 1997 में दिल्ली के 'ग्रैंड प्रिक्स' मुक़ाबलों में उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा हुई जब उसने एक से एक अच्छे खिलाड़ियों को हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया। यद्यपि फाइनल में वह हार गया। वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक में बैडमिंटन के लिए भारतीय खिलाड़ियों में केवल पुलेला गोपीचंद का ही नाम था। प्रकाश पादुकोने के रिटायर होने के पश्चात् भारत में कोई उत्तम बैडमिंटन खिलाड़ी बचा ही नहीं था, तब पुलेला का आगमन हुआ जिसमें असीम संभावनाएं दिखाई दीं। अतः प्रकाश पादुकोने के बाद आगे बढ़ कर चमकने वाला बैंडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद ही है। वह प्रतिभावान होने के साथ-साथ देखने में सुन्दर व आकर्षण भी है।

वर्ष 2000 में गोपीचंद थामस कप के फाइनल में पहुँचा था तो यूँ लगा था कि भारत खेलों में आगे बढ़ने लगा है। फिर जब गोपीचंद ने आल इंग्लैंड खिताब 2001 में जीता तब तो यूँ लगने लगा कि मानो हमें चाँद तक पहुँचने की सीढ़ी मिल गई हो। तब हमारे 6 खिलाड़ी विश्व के टॉप 100 खिलाड़ियों में शामिल हो गए थे लेकिन अब केवल 3 भारतीय खिलाड़ी ही उन टाप 100 खिलाड़ियों में हैं। 2001 में गोपीचंद विश्व की रैंकिंग में नं. 4 खिलाड़ी बन गया था।

ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप

11 मार्च 2001 को ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत कर भारत के स्टार शटलर पुलेला गोपीचंद ने भारतीय खेल जगत् में एक नया इतिहास लिख डाला। इससे 21 वर्ष पूर्व प्रकाश पादुकोने ने भारत में बैडमिंटन की ऊँचाइयों को छुआ था। पिछले ओलंपिक के गोल्ड पदक विजेता और विश्व के नम्बर 1 खिलाड़ी को क्वार्टर फाइनल और फिर सेमी फाइनल विश्व बैडमिंटन मुक़ाबले मे हराना और फिर फाइनल में भी हरा कर जीत जाना एक सपने जैसा था जैसा कि अक्सर भारतीय फ़िल्मों में हीरो के साथ होता है परंतु गोपीचंद ने इसे असल ज़िंदगी में कर दिखाया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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