"ग्वालियर" के अवतरणों में अंतर  

[अनिरीक्षित अवतरण][अनिरीक्षित अवतरण]
छो (Text replacement - " महान " to " महान् ")
 
पंक्ति 90: पंक्ति 90:
 
*पास ही अकबर के नवरत्नों में से एक तथा [[भारत]] के प्रसिद्ध संगीतज्ञ [[तानसेन]] की समाधि है।  
 
*पास ही अकबर के नवरत्नों में से एक तथा [[भारत]] के प्रसिद्ध संगीतज्ञ [[तानसेन]] की समाधि है।  
 
*यहाँ से एक मील की दूरी पर [[झांसी की रानी लक्ष्मीबाई|रानी लक्ष्मीबाई]] की प्रसिद्ध समाधि है। जो [[भारत]] के [[भारत का इतिहास#प्रथम स्वतंत्रता संग्राम|प्रथम स्वतंत्रता संग्राम]] में अंग्रेज़ों से वीरतापूर्वक लड़ते हुए मारी गई थी।
 
*यहाँ से एक मील की दूरी पर [[झांसी की रानी लक्ष्मीबाई|रानी लक्ष्मीबाई]] की प्रसिद्ध समाधि है। जो [[भारत]] के [[भारत का इतिहास#प्रथम स्वतंत्रता संग्राम|प्रथम स्वतंत्रता संग्राम]] में अंग्रेज़ों से वीरतापूर्वक लड़ते हुए मारी गई थी।
 
 
==जनसंख्या==
 
==जनसंख्या==
ग्वालियर की जनसंख्या (2001) की जनगणना के अनुसार नगर निगम क्षेत्र की 8,26,919 और ज़िले की कुल 16,29,821 है।
+
ग्वालियर की जनसंख्या (2001) की जनगणना के अनुसार नगर निगम क्षेत्र की 8,26,919 और ज़िले की कुल 16,29,821 है।  
+
{{लेख प्रगति |आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध=}}  
{{लेख प्रगति |आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध=}}
+
+
 
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
 
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
 
<references/>
 
<references/>
पंक्ति 101: पंक्ति 98:
 
[http://gwalior.nic.in/ अधिकारिक वेबसाइट]
 
[http://gwalior.nic.in/ अधिकारिक वेबसाइट]
 
==संबंधित लेख==
 
==संबंधित लेख==
{{मध्य प्रदेश के नगर}}
+
{{मध्य प्रदेश के नगर}}{{मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल}}
{{ब्रज}}{{ब्रज के दर्शनीय स्थल}}{{मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल}}
+
[[Category:मध्य_प्रदेश]][[Category:मध्य_प्रदेश_के_नगर]][[Category:मध्य_प्रदेश_के_पर्यटन_स्थल]][[Category:मध्य_प्रदेश_के_ऐतिहासिक_नगर]][[Category:भारत_के_नगर]][[Category:पर्यटन कोश]]
{{ब्रज के प्रमुख स्थल}}
+
[[Category:मध्य_प्रदेश]]
+
[[Category:मध्य_प्रदेश_के_नगर]]
+
[[Category:मध्य_प्रदेश_के_पर्यटन_स्थल]]
+
[[Category:मध्य_प्रदेश_के_ऐतिहासिक_नगर]]
+
[[Category:भारत_के_नगर]]
+
[[Category:पर्यटन कोश]]
+
[[Category:ब्रज]]
+
 
__INDEX__
 
__INDEX__
 
__NOTOC__
 
__NOTOC__

16:58, 1 अगस्त 2020 के समय का अवतरण

ग्वालियर
Gwalior-Fort-Gwalior.jpg
विवरण ग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। ये शहर और इसका क़िला उत्तर भारत के प्राचीन शहरों का केन्द्र रहे हैं।
राज्य मध्यप्रदेश
ज़िला ग्वालियर ज़िला
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 26.14°, पूर्व- 78.10°
मार्ग स्थिति दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से पलवल, कोसीकलाँ, होडल और मथुरा होते हुए आगरा पहुँचा जा सकता है जहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग 3 ग्वालियर से जुड़ा हुआ है।
कब जाएँ अक्टूबर से मार्च
कैसे पहुँचें बस, रेल, टैक्सी,
हवाई अड्डा ग्वालियर हवाई अड्डा
रेलवे स्टेशन ग्वालियर रेलवे स्टेशन
बस अड्डा ग्वालियर बस अड्डा
यातायात ताँगा, ऑटो रिक्शा, टैम्पो, बस, मिनी बस
क्या देखें ग्वालियर पर्यटन
कहाँ ठहरें होटल, धर्मशाला, अतिथि ग्रह
क्या खायें पोहा, गजक, नमकीन, दिल्ली वाले का परांठा, शेरे पंजाब भोजनालय का खाना
क्या ख़रीदें साबूदाना, साड़ियाँ, कपड़े, प्लास्टिक, ग्रासरी और टेक्सटाइल का सामान, ज्वेलरी, हस्तशिल्प
एस.टी.डी. कोड 0751
Map-icon.gif गूगल मानचित्र, ग्वालियर हवाई अड्डा
अद्यतन‎
ग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। ये शहर और इसका क़िला उत्तर भारत के प्राचीन शहरों का केन्द्र रहे हैं। ग्वालियर अपने पुरातन ऎतिहासिक संबंधों, दर्शनीय स्थलों और एक बड़े सांस्कृतिक, औद्योगिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस शहर को उसका नाम उस ऐतिहासिक पत्थरों से बने क़िले के कारण दिया जाता है, जो एक अलग-थलग, सपाट शिखर वाली 3 किलोमीटर लंबी तथा 90 मीटर ऊँची पहाड़ी पर बना है। इस नगर का उल्लेख गोप पर्वत, गोपाचल दुर्ग, गोपगिरी, गोपदिरी के रूप में हुआ है। इन सभी नामों का मतलब 'ग्वालों की पहाड़ी' होता है।
ग्वालियर का एक दृश्य
प्राचीन नाम गोपाद्रि या गोपगिरि है। जनश्रुति है कि राजपूत नरेश सूरजसेन ने ग्वालियर नाम के साधु के कहने से यह नगर बसाया था। ग्वालियर शहर के इस नाम के पीछे भी एक इतिहास छिपा है; आठवीं शताब्दी में एक राजा हुए सूरजसेन, एक बार वे एक अज्ञात बीमारी से ग्रस्त हो मृत्युशैया पर थे, तब 'ग्वालिपा' नामक संत ने उन्हें ठीक कर जीवनदान दिया। उन्हीं के सम्मान में इस शहर की नींव पडी और इसे नाम दिया ग्वालियर। आने वाली शताब्दियों के साथ यह शहर बड़े-बड़े राजवंशो की राजस्थली बना।
  • महाभारत[1] में गोपालकक्ष नामक स्थान पर भीम की विजय का उल्लेख है। संभवतः यह गोपाद्रि ही है।

इतिहास और भूगोल

यह शहर सदियों से राजपूतों की प्राचीन राजधानी रहा है, चाहे वे प्रतिहार रहे हों या कछवाहा या तोमर। इस शहर में इनके द्वारा छोडे ग़ये प्राचीन चिह्न स्मारकों, क़िलों, महलों के रूप में मिल जाएंगे। सहेज कर रखे गए अतीत के भव्य स्मृति चिह्नों ने इस शहर को पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाता है। यह नगर सामंती रियासत ग्वालियर का केंद्र था। जिस पर 18वीं सदी के उत्तरार्ध में मराठों के सिंधिया वंश का शासन था। रणोजी सिंधिया द्वारा 1745 में इस वंश की बुनियाद रखी गई और महादजी (1761-94) के शासनकाल में यह अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचा।

उनके अधीन क्षेत्र में सामान्य हिंदुस्तान के मुख्य हिस्से तथा मध्य भारत के कई हिस्से शामिल थे और उनके अधिकारी जोधपुर तथा जयपुर सहित अनेक स्वतंत्र राजपूत शासकों से भी नज़राना वसूल करते थे। दौलतराव के शासनकाल में अंग्रेज़ों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और 1840 के दशक में इस क्षेत्र में पूरा प्रभाव क़ायम किया। 1857 के विद्रोह के दौरान ग्वालियर के सिंधिया शासक अंग्रेज़ों के प्रति वफ़ादार बने रहे, किंतु उनकी सेना ने विद्रोहियों का साथ दिया।

पठारी इलाके में स्थित यह क्षेत्र सांक (शंख) नदी द्वारा कई जगहों पर प्रतिच्छेद है और घने जंगल से आच्छादित है। नगर तीन भिन्न बस्तियों से बना है। पुराना ग्वालियर, जो पर्वतीय क़िले के उत्तर में है और जहां मध्ययुगीन शौर्य के कई जीवंत स्मारक मौजूद हैं। क़िले के दक्षिण में स्थित लश्कर 1810 में दौलतराव सिंधिया की फ़ौजी छावनी बना था।

जय विलास पेलेस, ग्वालियर

हर सदी के साथ इस शहर के इतिहास को नये आयाम मिले। महान् योद्धाओं, राजाओं, कवियों संगीतकारों तथा सन्तों ने इस राजधानी को देशव्यापी पहचान देने में अपना-अपना योगदान दिया। आज ग्वालियर एक आधुनिक शहर है और एक जाना-माना औद्योगिक केन्द्र है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत सभापर्व 30,3

बाहरी कड़ियाँ

अधिकारिक वेबसाइट

संबंधित लेख

और पढ़ें
"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=ग्वालियर&oldid=648508" से लिया गया