बेसनगर  

हेलिओडोरस स्तंभ, विदिशा

बेसनगर पूर्वी मालवा में स्थित प्राचीन नगर विदिशा का ही आधुनिक नाम है। शुंग राजाओं के शासन काल में इस नगर का बहुत ही महत्त्व था। शुंग राजाओं के शासन के बाद भी अनेक वर्षों तक बेसनगर स्थानीय शासकों की राजधानी बना रहा। यहाँ के शासकों ने भारत की पश्चिमोत्तर सीमा पर स्थित यवन शासकों के साथ राजनीतिक सम्बन्ध बना रखे थे। बेसनगर में भगवान वासुदेव के सम्मान में तक्षशिला के राजा एंटिआल्किडस के राजदूत हेलियोडोरस ने लगभग 135 ई. पू. में एक 'गरुड़ ध्वज' स्थापित कराया गया था।

इतिहास

बेसनगर को पाली बौद्ध ग्रंथों में 'वेस्सागर' तथा संस्कृत साहित्य में विदिशा के नाम से पुकारा गया है। भिलसा रेलवे स्टेशन से पश्चिम की तरफ़ क़रीब 2 मील (लगभग 3.2 कि.मी.) की दूरी पर स्थित यह स्थान पुरातत्वेत्ताओं की सांस्कृतिक भूमि कहा जा सकता है। यह वेत्रवती और बेस नदी से घिरा हुआ है तथा शेष दो तरफ़ की भूमि पर प्राचीर बनाकर नगर को एक क़िले का रूप प्रदान कर दिया गया था।[1]

अवशेष

प्राचीन काल का वैभव संपन्न यह नगर अब टूटी-फूटी मूर्तियों व कलायुक्त भवनों का खंडहर मात्र रह गया है। यहाँ पाये जाने वाले भग्नावशेष ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक की कहानी कहते हैं। अब भी इस स्थान पर ही एक तरफ़ 'बेस' नामक ग्राम बचा हुआ है। बेसनगर का राजनीतिक महत्व मौर्य काल में अशोक के समय से बढ़ा। शुंग काल में यह बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र के रूप में दूर-दूर तक जाना जाता था। यह स्थान हिन्दूबौद्ध दोनों के लिए ही महत्त्वपूर्ण था। गुप्त काल तक इसकी समृद्धि क़ायम रही। उसके पश्चात् इसके कृत्रिम इतिहास का स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिलता।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 बेसनगर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 27 जनवरी, 2013।
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