शाहजहाँ  

शाहजहाँ
शाहजहाँ
पूरा नाम मिर्ज़ा साहब उद्दीन बेग़ मुहम्मद ख़ान ख़ुर्रम
अन्य नाम ख़ुर्रम
जन्म 5 जनवरी, सन् 1592
जन्म भूमि लाहौर
मृत्यु तिथि 22 जनवरी, सन् 1666
मृत्यु स्थान आगरा
पिता/माता जहाँगीर, जगत गोसाई (जोधाबाई)
पति/पत्नी अर्जुमन्द बानो (मुमताज)
संतान दारा शिकोह, शुज़ा, मुराद, औरंगज़ेब, जहाँआरा, रोशनआरा, गौहनआरा
उपाधि अबुल मुज़फ़्फ़र शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरन-ए-सानी, शाहजहाँ (जहाँगीर के द्वारा प्रदत्त)
राज्य सीमा उत्तर और मध्य भारत
शासन काल सन 8 नवम्बर 1627 - 2 अगस्त 1658 ई.
शा. अवधि 31 वर्ष
राज्याभिषेक 25 जनवरी, सन् 1628
धार्मिक मान्यता सुन्नी मुसलमान
प्रसिद्धि विश्व के सात आश्चर्य में एक-"ताजमहल" का निर्माण
निर्माण ताजमहल, लाल क़िला दिल्ली, मोती मस्जिद आगरा, जामा मस्जिद दिल्ली
राजधानी दिल्ली
पूर्वाधिकारी जहाँगीर
उत्तराधिकारी औरंगजेब
राजघराना मुग़ल
वंश तिमुरी वंश
मक़बरा ताजमहल
संबंधित लेख मुग़ल काल

मिर्ज़ा साहब उद्दीन बेग़ मुहम्मद ख़ान ख़ुर्रम (अंग्रेज़ी: Mirza Shahab-ud-din Baig Muhammad Khan Khurram, जन्म: 5 जनवरी, 1592, लाहौर; मृत्यु: 22 जनवरी, 1666, आगरा) पाँचवाँ मुग़ल शहंशाह था। शाहजहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़ा लोकप्रिय रहा। शाहजहाँ को सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुग़ल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था। 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठा।

जीवन परिचय

शाहजहाँ का जन्म जोधपुर के शासक राजा उदयसिंह की पुत्री 'जगत गोसाई' (जोधाबाई) के गर्भ से 5 जनवरी, 1592 ई. को लाहौर में हुआ था। उसका बचपन का नाम ख़ुर्रम था। ख़ुर्रम जहाँगीर का छोटा पुत्र था, जो छल−बल से अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ था। वह बड़ा कुशाग्र बुद्धि, साहसी और शौक़ीन बादशाह था। वह बड़ा कला प्रेमी, विशेषकर स्थापत्य कला का प्रेमी था। उसका विवाह 20 वर्ष की आयु में नूरजहाँ के भाई आसफ़ ख़ाँ की पुत्री 'आरज़ुमन्द बानो' से सन् 1611 में हुआ था। वही बाद में 'मुमताज़ महल' के नाम से उसकी प्रियतमा बेगम हुई। 20 वर्ष की आयु में ही शाहजहाँ, जहाँगीर शासन का एक शक्तिशाली स्तंभ समझा जाता था। फिर उस विवाह से उसकी शक्ति और भी बढ़ गई थी। नूरजहाँ, आसफ़ ख़ाँ और उनका पिता मिर्ज़ा गियासबेग़ जो जहाँगीर शासन के कर्त्ता-धर्त्ता थे, शाहजहाँ के विश्वसनीय समर्थक हो गये थे। शाहजहाँ के शासन−काल में मुग़ल साम्राज्य की समृद्धि, शान−शौक़त और ख्याति चरम सीमा पर थी। उसके दरबार में देश−विदेश के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति आते थे। वे शाहजहाँ के वैभव और ठाट−बाट को देख कर चकित रह जाते थे। उसके शासन का अधिकांश समय सुख−शांति से बीता था; उसके राज्य में ख़ुशहाली रही थी। उसके शासन की सब से बड़ी देन उसके द्वारा निर्मित सुंदर, विशाल और भव्य भवन हैं। उसके राजकोष में अपार धन था। सम्राट शाहजहाँ को सब सुविधाएँ प्राप्त थीं।

संबंधित लेख


और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=शाहजहाँ&oldid=628958" से लिया गया