जहाँगीर  

जहाँगीर
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पूरा नाम मिर्ज़ा नूर-उद्दीन बेग़ मोहम्मद ख़ान सलीम जहाँगीर
अन्य नाम शेख़ू
जन्म 30 अगस्त, सन् 1569
जन्म भूमि फ़तेहपुर सीकरी
मृत्यु तिथि 8 नवम्बर सन् 1627 (उम्र 58 वर्ष)
मृत्यु स्थान लाहौर
पिता/माता पिता- अकबर, माता- मरियम उज़-ज़मानी
पति/पत्नी नूरजहाँ, मानभवती, मानमती
संतान ख़ुसरो मिर्ज़ा, ख़ुर्रम (शाहजहाँ), परवेज़, शहरयार, जहाँदारशाह, निसार बेगम, बहार बेगम बानू
राज्य सीमा उत्तर और मध्य भारत
शासन काल सन 15 अक्टूबर, 1605 ई. - 8 नवंबर, 1627 ई.
शा. अवधि 22 वर्ष
राज्याभिषेक 24 अक्टूबर 1605 आगरा
धार्मिक मान्यता सुन्नी, मुस्लिम
राजधानी आगरा, दिल्ली
पूर्वाधिकारी अकबर
उत्तराधिकारी शाहजहाँ
राजघराना मुग़ल
मक़बरा शहादरा लाहौर, पाकिस्तान
संबंधित लेख मुग़ल काल
प्रसिद्धि जहाँगीर का न्याय
सम्बंधित लेख मुग़ल वंश, मुग़ल काल, मुग़ल साम्राज्य, इंसाफ़ की ज़ंजीर
अन्य जानकारी 'सलीम' और 'अनारकली' की बेहद मशहूर और काल्पनिक प्रेम कहानी पर बनी फ़िल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' भारत की महान् फ़िल्मों में गिनी जाती है।

(शासन काल सन् 1605 से सन् 1627)
मिर्ज़ा नूर-उद्दीन बेग़ मोहम्मद ख़ान सलीम जहाँगीर (अंग्रेज़ी: Mirza Nur-ud-din Baig Mohammad Khan Salim Jahangir, जन्म- 30 अगस्त, 1569, फ़तेहपुर सीकरी; मृत्यु- 8 नवम्बर, 1627, लाहौर) मुग़ल वंश का चौथा बादशाह था। वह महान मुग़ल बादशाह अकबर का पुत्र था। अकबर के तीन पुत्र थे। सलीम (जहाँगीर), मुराद और दानियाल। मुराद और दानियाल पिता के जीवन में शराब पीने की वजह से मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे। सलीम अकबर की मृत्यु पर 'नूरुद्दीन मोहम्मद जहाँगीर' के उपनाम से तख्त पर बैठा। उसने 1605 ई. में कई उपयोगी सुधार लागू किए। कान, नाक और हाथ आदि काटने की सजा रद्द कीं। शराब और अन्य नशे आदि वाली वस्तुओं का हकमा बंद करवा दिया। कई अवैध महसूलात हटा दिए। किसी की भी फ़रियाद सुनने के लिए उसने अपने महल की दीवार से जंजीर लटका दी, जिसे 'न्याय की जंजीर' कहा जाता था।

परिचय

जहाँगीर का जन्म फ़तेहपुर सीकरी में स्थित ‘शेख़ सलीम चिश्ती’ की कुटिया में राजा भारमल की बेटी ‘मरियम ज़मानी’ के गर्भ से 30 अगस्त, 1569 ई. को हुआ था। अकबर सलीम को ‘शेख़ू बाबा’ कहा करता था। सलीम का मुख्य शिक्षक अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना था। अपने आरंभिक जीवन में जहाँगीर शराबी और आवारा शाहज़ादे के रूप में बदनाम था। उसके पिता सम्राट अकबर ने उसकी बुरी आदतें छुड़ाने की बड़ी चेष्टा की, किंतु उसे सफलता नहीं मिली। इसीलिए समस्त सुखों के होते हुए भी वह अपने बिगड़े हुए बेटे के कारण जीवन-पर्यंत दुखी: रहा। अंतत: अकबर की मृत्यु के पश्चात् जहाँगीर ही मुग़ल सम्राट बना था। उस समय उसकी आयु 36 वर्ष की थी। ऐसे बदनाम व्यक्ति के गद्दीनशीं होने से जनता में असंतोष एवं घबराहट थी। लोगों को आंशका होने लगी कि, अब सुख−शांति के दिन विदा हो गये और अशांति−अव्यवस्था एवं लूट−खसोट का ज़माना फिर आ गया। उस समय जनता में कितना भय और आतंक था, इसका विस्तृत वर्णन जैन कवि बनारसीदास ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'अर्थकथानक' में किया है। उसका कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत है,−

"घर−घर, दर−दर दिये कपाट। हटवानी नहीं बैठे हाट।
भले वस्त्र अरू भूषण भले। ते सब गाढ़े धरती चले।
घर−घर सबन्हि विसाहे अस्त्र। लोगन पहिरे मोटे वस्त्र।।"

बाहरी कड़ियाँ

www.incois.gov.in/Tutor

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