निज़ामुद्दीन औलिया  

निज़ामुद्दीन औलिया
अमीर खुसरो के साथ निज़ामुद्दीन औलिया
पूरा नाम ख़्वाजा हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया
जन्म 1238
जन्म भूमि बदायूँ, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 3 अप्रैल, 1325
मृत्यु स्थान दिल्ली
अभिभावक अहमद बदायनी और बीबी ज़ुलेखा
गुरु बाबा फ़रीद
कर्म-क्षेत्र धर्म प्रवर्तक और संत
प्रसिद्धि चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख निज़ामुद्दीन दरगाह
अन्य जानकारी अमीर खुसरो, हज़रत निजामुद्दीन के सबसे प्रसिद्ध शिष्य थे।

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया (अंग्रेज़ी: Hazrat Nizamuddin Auliya, जन्म:1238 - मृत्यु: 1325) चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत थे। इस सूफ़ी संत ने वैराग्य और सहनशीलता की मिसाल पेश की। कहा जाता है कि 1303 में इनके कहने पर मुग़ल सेना ने हमला रोक दिया था, इस प्रकार ये सभी धर्मों के लोगों में लोकप्रिय बन गए। हज़रत साहब ने 92 वर्ष की आयु में प्राण त्यागे और उसी वर्ष उनके मकबरे का निर्माण आरंभ हो गया, किंतु इसका नवीनीकरण 1562 तक होता रहा। दक्षिणी दिल्ली में स्थित हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का मकबरा सूफ़ी काल की एक पवित्र दरगाह है।

जीवन परिचय

हज़रत ख्वाज़ा निज़ामुद्दीन औलिया का जन्म 1238 में उत्तर प्रदेश के बदायूँ ज़िले में हुआ था। ये पाँच वर्ष की उम्र में अपने पिता, अहमद बदायनी, की मॄत्यु के बाद अपनी माता, बीबी ज़ुलेखा के साथ दिल्ली में आए। इनकी जीवनी का उल्लेख आइन-इ-अकबरी, एक 16वीं शताब्दी के लिखित प्रमाण में अंकित है, जो कि मुग़ल सम्राट अकबर के एक नवरत्नों ने लिखा था। 1269 में जब निज़ामुद्दीन 20 वर्ष के थे, वह अजोधर (जिसे वर्तमान में पाकपट्ट्न शरीफ, जो कि पाकिस्तान में स्थित है) पहुँचे और सूफ़ी संत फ़रीद्दुद्दीन गंज-इ-शक्कर के शिष्य बन गये, जिन्हें सामान्यतः बाबा फरीद के नाम से जाना जाता था। निज़ामुद्दीन ने अजोधन को अपना निवास स्थान तो नहीं बनाया पर वहाँ पर अपनी आध्यात्मिक पढ़ाई जारी रखी, साथ ही साथ उन्होंने दिल्ली में सूफ़ी अभ्यास जारी रखा। वह हर वर्ष रमज़ान के महीने में बाबा फरीद के साथ अजोधन में अपना समय बिताते थे। इनके अजोधन के तीसरे दौरे में बाबा फरीद ने इन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया, वहाँ से वापसी के साथ ही उन्हें बाबा फरीद के देहान्त की खबर मिली। इनके बहुत से शिष्यों को आध्यात्मिक ऊँचाई की प्राप्त हुई, जिनमें ’शेख नसीरुद्दीन मोहम्मद चिराग-ए-दिल्ली”, “अमीर खुसरो”,जो कि विख्यात विद्या ख्याल/संगीतकार और दिल्ली सल्तनत के शाही कवि के नाम से प्रसिद्ध थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ख़्वाजा हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया (हिंदी) सूफ़ी दरवेस। अभिगमन तिथि: 14 फ़रवरी, 2013।

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