रोज़ा  

रोज़ा
इस्लाम धर्म का प्रतीक चिह्न
विवरण रोज़ा रमज़ानुल मुबारक के पूरे महीने का रखना है जो साल भर में एक बार आता है।
अभिप्राय रोज़े की नियत से, फज्र निकलने से लेकर सूरज डूबने तक, तमाम रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों जैसे कि खाने पीने और सम्भोग से रूक जाना।
तिथि पवित्र माह रमज़ान के पूरे दिन रोज़े रखे जाते हैं जो ईद वाले दिन समाप्त होते हैं।
संबंधित लेख नमाज़, रमज़ान, ईद-उल-फ़ितर
अन्य जानकारी रोज़ा पाचन क्रिया और मेदा (आमाशय) को सालों साल लागातार (निरंतर) कार्य करने के कष्ट से आराम पहुंचाता है, अनावश्यक चीज़ों (फजूलात, मल) को पिघला देता है, शरीर को शक्ति प्रदान करता है, तथा वह बहुत से रोगों के लिए भी लाभदायक है।

रोज़ा यानी तमाम बुराइयों से रुकना या परहेज़ करना। ज़बान से ग़लत या बुरा नहीं बोलना, आँख से ग़लत नहीं देखना, कान से ग़लत नहीं सुनना, हाथ-पैर तथा शरीर के अन्य हिस्सों से कोई नाजायज़ अमल नहीं करना। किसी को भला बुरा नहीं कहना। हर वक़्त ख़ुदा की इबादत करना। रोज़े को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना।

अभिप्राय

इससे अभिप्राय यह है कि : रोज़े की नियत से, फज्र निकलने से लेकर सूरज डूबने तक, तमाम रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों जैसे कि खाने पीने और सम्भोग से रूक जाना। यह रोज़ा रमज़ानुल मुबारक के पूरे महीने का रखना है जो साल भर में एक बार आता है।

अल्लाह तआला का फरमान है 
(يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى الَّذِينَ مِنْ قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ) (183 البقرة,)

ऐ लोगो जो र्इमान लाऐ हो तुम पर रोज़े रखना अनिवार्य किया गया है जिस प्रकार तुम से पूर्व के लोगों पर अनिवार्य किया गया था, ताकि तुम डरने वाले (परहेज़गार) बन जाओ।[1]

और रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया
(متفق عليه);; من صام رمضان إيمانا واحتسابا غفر له ما تقدم من ذنبه

जिसने र्इमान के साथ और सवाब की नियत रखते हुए रोज़ा रखा उसके पिछले गुनाह क्षमा कर दिए जायेंगे। (बुखारी व मुस्लिम)[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. (सूरतुल-बक्रा: 183)
  2. 2.0 2.1 चौथा स्तम्भ : रोज़ा (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 28 जुलाई, 2013।
  3. (क़ुरआन, 51:56)
  4. (क़ुरआन, 2:183)
  5. ’ (क़ुरआन, 2:185)
  6. ’ (हदीस : दारमी)
  7. (हदीस : बुख़ारी व मुस्लिम)
  8. (हदीस : इब्ने माजा)
  9. रोज़ा क्या और क्यों? (हिंदी) इस्लाम धर्म। अभिगमन तिथि: 28 जुलाई, 2013।
  • हज़रत : आदरणीय व्यक्तित्व के लिए उपाधि सूचक शब्द।
  • सल्ल॰ : हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) पर अल्लाह की रहमत व सलामती हो।
  • हदीस : अल्लाह के अन्तिम सन्देष्टा हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के वचनों, कर्मों और तरीकों (ढंगों) को हदीस कहते हैं।

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