बोहरा  

बोहरा मुस्लिमों की ही एक जाति है, जो शिया समुदाय को मानती है। बोहरा लोग शिया इस्माईली मुस्लिम हैं और पश्चिम भारत के निवासी हैं। यह अधिकांशत: व्यापार आदि में संलग्न रहते हैं। बोहरा मुस्लिम किसी भी मस्जिद में नहीं जाते, वे केवल मज़ारों पर ही जाते हैं। ये लोग सूफ़ियों पर अधिक विश्वास करते है, अल्लाह पर नहीं।

  • 'बोहरा' गुजराती शब्द 'वहौराउ', अर्थात्- 'व्यापार करना' का अपभ्रंश है। इसमें व्यापारी वर्ग के शिया बहुसंख्यक और आमतौर पर किसान सुन्नी अल्पसंख्यक शामिल हैं।
  • मूलत: मिस्र में उत्पन्न और बाद में अपना धार्मिक केंद्र यमन ले जाने वाले मुस्ताली मत ने 11वीं शताब्दी में धर्म प्रचारकों के माध्यम से भारत में अपनी जगह बनाई।
  • 1539 के बाद जब भारतीय समुदाय बहुत बड़ा हो गया, तब इस मत का मुख्यालय यमन से भारत में सिद्धपुर लाया गया।
  • 1588 में दाऊद बिन कुतब शाह और सुलेमान के अनुयायियों के कारण बोहरा समुदाय में विभाजन हुआ और दोनों ने समुदाय के नेतृत्व का दावा किया।
  • बोहराओं में दाऊद और सुलेमान के अनुयायियों के दो प्रमुख समूह बन गये, जिनके धार्मिक सिद्धांतों में कोई ख़ास सैद्धांतिक अंतर नहीं है।
  • दाऊदियों के प्रमुख मुम्बई में तथा सुलेमानियों के प्रमुख यमन में रहते हैं।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय इतिहास कोश |लेखक: सच्चिदानन्द भट्टाचार्य |प्रकाशक: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान |पृष्ठ संख्या: 67 |

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