तिरुमूलर  

तिरुमूलर
तिरुमूलर
कर्म भूमि दक्षिण भारत
मुख्य रचनाएँ 'तिरुमंत्रम्'
भाषा तमिल
प्रसिद्धि तमिल शैव संत तथा योगी
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख शैव सम्प्रदाय, शिव, तमिल साहित्य
अन्य जानकारी तिरुमूलर कैलास के सिद्ध थे। यह माना जाता है कि स्वयं भगवान शिव से ज्ञान प्राप्त कर उन्होंने जनता में उसका प्रचार किया था।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

तिरुमूलर (800 ई.) प्रसिद्ध शिव भक्त तथा तमिल ग्रंथ 'तिरुमंत्रम्' के रचयिता थे। तमिल के विद्वान् शैव संत तिरुमूलर को महान् सिद्ध संत मानते हैं। वे कैलास के सिद्ध थे और स्वयं शिव से ज्ञान प्राप्त कर उन्होंने जनता में उसका प्रचार किया था। उनका लक्ष्य जातिनिरपेक्ष मानव की सेवा करना था। उन्होंने रूढ़िग्रस्त शास्त्रों का विरोध किया और समन्वयवादी ढंग से भक्ति का प्रचार किया।

परिचय

तिरुमूलर का जीवनवृत संक्षेप में शेक्किषार के 'पैरिय पुराण' में 28 चतुष्पदों मे मिलता है। वे कैलास के सिद्ध थे और स्वयं शिव से ज्ञान प्राप्त कर उन्होने जनता में उसका प्रचार किया था। उनका लक्ष्य जातिनिरपेक्ष मानव की सेवा करना था। उन्होंने रूढ़िग्रस्त शास्त्रों का विरोध किया और समन्वयवादी ढंग से भक्ति का प्रचार किया। उनका एकमात्र प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुमंत्रम्‌' है। अधिकांश विद्वान्‌ इन्हें छठी या सातवीं शताब्दी का मानते है। 'पेरिय पुराण' के अनुसार संत तिरुमूलर ने कैलाश, केदान, नेपाल, काशी, विंध्याचल और श्रीशैल आदि स्थानों का भ्रमण किया और अंत में अगस्तय मुनि से मिलने दक्षिणापथ में पधारे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

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