सास बहू का मंदिर, उदयपुर  

Disamb2.jpg सास बहू का मंदिर एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- सास बहू का मंदिर (बहुविकल्पी)
सास बहू का मंदिर, उदयपुर
सास-बहू मंदिर, उदयपुर
विवरण 'सास-बहू का मंदिर' उदयपुर का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर लगी सुर-सुंदरियों की प्रतिमाएँ नारी सौंदर्य का सजीव वर्णन करती-सी प्रतीत होती हैं।
राज्य राजस्थान
ज़िला उदयपुर
निर्माण काल 10वीं सदी
समर्पित देव भगवान विष्णु
स्थिति राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर उदयपुर से 23 कि.मी. की दूरी पर स्थित।
संबंधित लेख राजस्थान, उदयपुर, मेवाड़, मेवाड़ का इतिहास, मेवाड़ (आज़ादी से पूर्व)
अन्य जानकारी विक्रमी संवत ग्यारहवीं शताब्दी के आसपास बने 'सास-बहु' के इन मंदिरों के बारे में अनुमान है कि मेवाड़ राजघराने की राजमाता ने विष्णु का तथा बहू ने शेषनाग के मंदिर का निर्माण कराया था।

सास बहू का मंदिर राजस्थान में उदयपुर के प्रसिद्ध ऐतिहासिक तथा पर्यटन स्थलों में से एक है। बहू का मंदिर, जो सास मंदिर से थोड़ा छोटा है, में एक अष्टकोणीय आठ नक़्क़ाशीदार महिलाओं से सजायी गई छत है। एक मेहराब सास मंदिर के सामने स्थित है। मंदिर की दीवारों को रामायण महाकाव्य की विभिन्न घटनाओं के साथ सजाया गया है। मूर्तियों को दो चरणों में इस तरह से व्यवस्थित किया गया है कि एक-दूसरे को घेरे रहती हैं। मंदिर में भगवान ब्रह्मा, शिव और विष्णु की छवियाँ एक मंच पर खुदी हैं और दूसरे मंच पर राम, बलराम और परशुराम के चित्र हैं।[1]

निर्माण तथा स्थिति

10वीं सदी में निर्मित सास-बहू मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह नागदा ग्राम में राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर उदयपुर से 23 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। मंदिर दो संरचनाओं का बना है, उनमें से एक 'सास' द्वारा और एक 'बहू' के द्वारा बनाया गया है। मंदिर में प्रवेश द्वार, नक़्क़ाशीदार छत और बीच में कई खाँचों वाली मेहराब हैं। एक वेदी, एक मंडप (स्तंभ प्रार्थना हॉल), और एक पोर्च मंदिर के दोनों संरचनाओं की सामान्य विशेषताएं हैं।

मेवाड़ से सम्बंध

उदयपुर से मात्र 28 किलोमीटर की दूरी पर है जगप्रसिद्ध 'एकलिंगजी का मंदिर'। इस मंदिर से थोड़ा पहले ही, कच्चे रास्ते पर खड़े हैं वास्तुकला के बेजोड़ नमूने सास-बहू के मंदिर। इन्हीं मंदिरों के आसपास कभी मेवाड़ राजवंश की स्थापना हुई थी। इनकी पहली राजधानी नागदा थी। नागदा के वैभव की याद दिलाने में ये सास-बहू के मंदिर आज भी सक्षम हैं। मेवाड़ राज्य के संस्थापक बप्पा रावल ने अपना प्रारंभिक जीवन यहीं नागदा में व्यतीत किया था।[2] मेवाड़ की यह प्राचीन राजधानी नागदा तो अब ध्वस्त हो चुकी है, लेकिन किसी तरह से यहाँ सास-बहू मंदिर बचे रह गए हैं। इन मंदिरों और नागदा के ध्वंसावशेष के आधार पर यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि यहाँ कभी उत्कृष्ट कला का विकास हुआ था। मेवाड़ राज्य अपनी स्थापना से ही दिल्ली पर राज्य करने वालों को चुभता रहा था। दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान शम्सुद्दीन अल्तमश ने तो इस पर आक्रमण कर इसे ध्वस्त ही कर डाला।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सास-बहू मंदिर, उदयपुर (हिन्दी) नेटिव प्लेनेट। अभिगमन तिथि: 31 दिसम्बर, 2014।
  2. 2.0 2.1 2.2 उदयपुर में सास बहू के मंदिरessmonthday= 31 दिसम्बर (हिन्दी) अभिव्यक्ति।

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