हर्षत माता मंदिर  

हर्षत माता मंदिर
हर्षत माता मंदिर
विवरण 'हर्षत माता मंदिर' राजस्थान के आभानेरी नामक ग्राम में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है। यह मंदिर अब 'भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग' के नियंत्रण में है।
राज्य राजस्थान
ज़िला दौसा
निर्माण काल आठवीं-नौवीं सदी
निर्माणकर्ता राजा चाँद
स्थापत्य शैली महामेरू
प्रतिमा मंदिर के भीतर हर्षत माता की प्राचीन मूर्ति नजर नहीं आती, बल्कि नए शिल्प की पाषाण की दुर्गा प्रतिमा को पूजा जाता है। संभवत: आक्रमणकारियों द्वारा मुख्य मूर्ति पूर्ण रूप से खंडित कर दी गई थी।
संबंधित लेख आभानेरी, चाँद बावड़ी, राजस्थान का इतिहास
अन्य जानकारी 'हर्षत माता का मंदिर' गुप्त काल से मध्य काल के बीच निर्मित अद्वितीय इमारतों में से एक मानी जाती है। दुनिया भर के संग्रहालयों में यहाँ से प्राप्त मूर्तियां आभानेरी का नाम रोशन कर रही हैं।

हर्षत माता मंदिर राजस्थान के दौसा ज़िले में स्थित आभानेरी गाँव में 'चाँद बावड़ी' के ठीक विपरीत दिशा में स्थित है। ये मंदिर हिन्दू देवी हर्षत माता को समर्पित है, जो हर्ष और उल्लास की देवी हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि देवी सदैव खुश रहती हैं और सब पर अपनी कृपा बरसाती हैं। यहाँ हर्षत माता देवी को सम्मान देते हुए हर वर्ष एक तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु और आसपास के ज़िलों के व्यापारी एकत्र होते हैं। ये मंदिर जो अपनी पत्थर की वास्तुकला के लिए जाना जाता है, अब 'भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग' के नियंत्रण में है।

निर्माण

इस विशाल मंदिर का निर्माण चौहान वंशीय राजा चांद ने आठवीं-नवीं सदी में करवाया था। राजा चांद तत्कालीन आभानेरी के शासक थे। उस समय आभानेरी आभा नगरी' के नाम से जानी जाती थी।

हर्षत माता का अर्थ है "हर्ष देने वाली"। कहा जाता है कि राजा चांद अपनी प्रजा से बहुत प्यार करते थे। साथ ही वे स्थापत्य कला के पारखी और प्रेमी थे। वे दुर्गा को शक्ति के रूप में पूजते थे। अपने राज्य पर माता की कृपा मानते थे। अपने शासन काल के दौरान उन्होंने यहां दुर्गा माता का मंदिर बनवाया। कहा जाता है कि आभानगरी में उस समय सुख शांति और वैभव की कोई कमी नहीं थी और राजा चांद सहित रियासत की प्रजा यह मानती थी कि राज्य की खुशहाली और हर्ष दुर्गा माँ की देन है। इसी सोच के साथ दुर्गा का यह मंदिर हर्षत अर्थात 'हर्ष की दात्री' के नाम से भी जाना जाने लगा।[1]

संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक

हर्षत माता का पूर्वमुखी मंदिर 'भारतीय पुरातत्त्व विभाग' द्वारा चारों ओर से लोहे की मेढ़ बनाकर संरक्षित किया गया है। मंदिर के सामने हनुमानजी का एक छोटा मंदिर है। यह मंदिर प्रसिद्ध 'चाँद बावड़ी' और हर्षत माता मंदिर के बीच में है। लोहे के गेट से मंदिर में प्रवेश करने पर बायें ओर मंदिर के बारे में ऐतिहासिक जानकारी और पुरातत्व विभाग का बोर्ड लगा है, जिसमें उल्लेख है कि यह संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 हर्षत माता का मन्दिर (हिन्दी) पिंक सिटी.कॉम। अभिगमन तिथि: 06 अक्टूबर, 2014।

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