भरतपुर  

भरतपुर
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विवरण भरतपुर पूर्वी राजस्थान राज्य, पश्चिमोत्तर भारत का एक महत्त्वपूर्ण ज़िला है। यह आगरा से 55 किमी. पश्चिम में स्थित है। लगभग 1733 ई. में स्थापित यह शहर कभी भूतपूर्व भरतपुर रियासत की राजधानी था।
राज्य राजस्थान
ज़िला भरतपुर
स्थापना सन 1700 ई. में एक चूणामणि जाट द्वारा स्थापित
भौगोलिक स्थिति [ उत्तर- 27° 13′ 12″ - पूर्व- 77° 28′ 48″]
प्रसिद्धि पक्षी उद्यान के लिए प्रसिद्ध है।
रेलवे स्टेशन भरतपुर रेलवे स्टेशन
यातायात ऑटो रिक्शा, टोंगा, टैक्सी और बस
क्या देखें डीग महल, डीग क़िला, लोहागढ़ क़िला, भरतपुर
कहाँ ठहरें होटल, धर्मशाला, अतिथि ग्रह
क्या ख़रीदें हाथीदाँत, चाँदी या चन्दन की लकड़ी के हत्थे वाले हाथ से बने चंवर आदि।
एस.टी.डी. कोड 321001
ए.टी.एम लगभग सभी
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
अन्य जानकारी 29 वर्ग किलोमीटर में फैला यह उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है । विश्‍व धरोहर सूची में शामिल यह स्थान प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा है । यहाँ आने वाले हर पर्यटन के आकर्षण का केंद्र पक्षी उद्यान ही रहता है।

भरतपुर पूर्वी राजस्थान राज्य, पश्चिमोत्तर भारत का एक महत्त्वपूर्ण ज़िला है। यह आगरा से 55 किमी. पश्चिम में स्थित है। लगभग 1733 ई. में स्थापित यह शहर कभी भूतपूर्व भरतपुर रियासत की राजधानी था। भरतपुर शहर की बात की जाए, तो इसकी स्थापना 'ठाकुर चूड़ामन सिंह' (चूणामणि) जाट ने की थी, लेकिन बाद में शासक राजा सूरजमल ने इसे सजाया और सँवारा। यह अपने समय में जाटों का गढ़ हुआ करता था। यहाँ के मंदिर, महल व क़िले जाटों के कला कौशल की गवाही देते हैं। राष्ट्रीय उद्यान के अलावा भी देखने के लिए यहाँ अनेक जगह हैं । इसका नामकरण राम के भाई भरत के नाम पर किया गया है । लक्ष्मण इस राजपरिवार के कुलदेव माने गये हैं। इसके पूर्व यह जगह सोगरिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में थी, जिसको महाराजा सूरजमल ने जीता और 1733 ई. में भरतपुर नगर की नींव डाली।

इतिहास

भरतपुर भूतपूर्व जाट-रियासत का मुख्य नगर है, जिसकी स्थापना चूणामणि जाट ने 1700 ई. के लगभग की थी। इमादउस-सयादत के लेखक के अनुसार चूरामन (चूणामणि) ने जो अपने प्रारम्भिक जीवन में लूटमार किया करता था, भरतपुर की नींव एक सुदृढ़ गढ़ी के रूप में डाली थी। यह स्थान आगरा से मात्र 48 कोस पर स्थित था। गढ़ी के चारों ओर एक गहरी परिखा थी। धीरे-धीरे चूरामन ने इसको एक मोटी व मज़बूत मिट्टी की दीवार से घेर लिया। गढ़ी के अन्दर ही वह अपना लूट का माल लाकर जमा कर देता था। आसपास के कुछ गाँवों में उसने कुछ चर्मकारों को यहाँ लाकर बसाया और गढ़ी की रक्षा का भार उन्हें सौंप दिया। जब उसके सैनिकों की संख्या लगभग चौदह हज़ार हो गई तो चूरामन एक विश्वस्त सरदार को गढ़ी का अधिकार देकर लूटमार करने के लिए कोटा-बूँदि की ओर चला गया।

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