शुचींद्रम शक्तिपीठ  

शुचींद्रम शक्तिपीठ
शुचींद्रम तीर्थ, कन्याकुमारी
वर्णन कन्याकुमारी के 'त्रिसागर' संगम स्थल से 13 किलोमीटर की दूरी पर शुचींद्रम में स्थित स्थाणु-शिव के मंदिर में ही शुचि शक्तिपीठ स्थापित है।
स्थान सुचिन्द्रम, कन्याकुमारी (तमिल नाडु)
देवी-देवता शक्ति- 'नारायणी' तथा शिव- 'संहार या 'संकूर'
संबंधित लेख शक्तिपीठ, सती, शिव, पार्वती
धार्मिक मान्यता यहाँ सती के 'ऊर्ध्वदंत'[1] गिरे थे। मान्यता है कि यहाँ देवी अब तक तपस्यारत हैं।
अन्य जानकारी नवरात्र, चैत्र पूर्णिमा, आषाढ़ एवं आश्विन अमावस्या, शिवरात्रि आदि विशेष सुअवसरों पर यहां विशेष उत्सव होते हैं, जिसमें देवी माँ का हीरों से श्रृंगार किया जाता है।

शुचींद्रम शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है।

धार्मिक मान्यता

तमिलनाडु में कन्याकुमारी के 'त्रिसागर' संगम स्थल से 13 किलोमीटर की दूरी पर शुचींद्रम में स्थित स्थाणु-शिव के मंदिर में ही शुचि शक्तिपीठ स्थापित है। यहाँ सती के 'ऊर्ध्वदंत'[2] गिरे थे। यहाँ की शक्ति 'नारायणी' तथा भैरव 'संहार या 'संकूर' हैं। मान्यता है कि यहाँ देवी अब तक तपस्यारत हैं। शुचींद्रम क्षेत्र को ज्ञानवनम् क्षेत्र भी कहते हैं। महर्षि गौतम के शाप से इंद्र को यहीं मुक्ति मिली थी, वह शुचिता (पवित्रता) को प्राप्त हुए, इसीलिए इसका नाम शुचींद्रम पड़ा।[3]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मतांतर से पृष्ठ भाग
  2. मतांतर से पृष्ठ भाग
  3. 3.0 3.1 पुस्तक- महाशक्तियाँ और उनके 51 शक्तिपीठ | लेखक- गोपालजी गुप्त | पृष्ठ संख्या-85 | प्रकाशक- पुस्तक महल
  4. शुचींद्रम मंदिर, शक्तिपीठ (हिन्दी) रफ़्तार। अभिगमन तिथि: 25 सितम्बर, 2014।

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