ज्वालामुखी शक्तिपीठ  

ज्वालामुखी शक्तिपीठ
ज्वालामुखी शक्तिपीठ
वर्णन हिमाचल प्रदेश में स्थित 'ज्वालामुखी शक्तिपीठ' भारतवर्ष के अज्ञात 108 एवं ज्ञात 51 पीठों में से एक है। इसका हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है।
स्थान कांगड़ा जनपद, हिमाचल प्रदेश
देवी-देवता सती 'सिद्धिदा अम्बिका' तथा शिव 'उन्मत्त'।
संबंधित लेख शक्तिपीठ, सती
पौराणिक मान्यता मान्यतानुसार यह माना जाता है कि इस स्थान पर देवी सती की 'जिह्वा का निपात' हुआ था।
विशेष मंदिर में दस ज्योतियाँ तो मुख्य हैं, किंतु अंदर अनेक ज्वालाएँ प्रस्फुटित होती हैं, जो मंदिर कि भित्ति के पिछले भाग से निकलती हैं। वैसे ये ज्योतियाँ अनंत काल से जल रही हैं।
अन्य जानकारी यहाँ स्थित एक छोटे से कुण्ड में जल सदैव खौलता रहता है, किंतु आश्चर्य यह कि छूने पर वह जल बिल्कुल ठण्डा लगता है।

ज्वालामुखी शक्तिपीठ हिन्दू धर्म में प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ माता सती के अंग के टुकड़े, धारण किये हुए वस्त्र और आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ पर शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। इन शक्तिपीठों का धार्मिक दृष्टि से बड़ा ही महत्त्व है। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाते हैं। ये तीर्थ पूरे भारतीय उप-महाद्वीप में फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है। 'ज्वालामुखी शक्तिपीठ' इन्हीं 51 शक्तिपीठों में से एक है।

स्थिति

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के अंतर्गत 'ज्वालामुखी का मंदिर' ही शक्तिपीठ है। यहाँ माता सती की 'जिह्वा' गिरी थी। यहाँ माता सती 'सिद्धिदा अम्बिका' तथा भगवान शिव 'उन्मत्त' रूप में विराजित है। हिमाचल प्रदेश की काँगड़ा घाटी में, पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज़ रेलमार्ग पर ज्वालामुखी रोड स्टेशन से 21 किलोमीटर, काँगड़ा से 34 किलोमीटर तथा धर्मशाला से 56 किलोमीटर दूर कालीधर पर्वत की सुरम्य तलहटी में स्थित है, 'ज्वाला देवी' या 'ज्वालामुखी' शक्तिपीठ। यहाँ सती की 'जिह्वा का निपात' हुआ था तथा जहाँ मंदिर में कोई प्रतिमा नहीं है, वरन् वहाँ माँ प्रज्जवलित प्रस्फुटित होती हैं। यहाँ की शक्ति 'सिद्धिदा' व भैरव 'उन्मत्त' हैं। यहाँ पर मंदिर के अंदर कुल 10 ज्योतियाँ निकलती हैं- दीवार के गोखले से 4, मध्य कुण्ड की भित्ति से 4 दाहिनी दीवार से एक तथा कोने से एक।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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