हरसिद्धि शक्तिपीठ  

हरसिद्धि शक्तिपीठ
हरसिद्धि शक्तिपीठ, उज्जैन
वर्णन उज्जैन स्थित 'हरसिद्धि शक्तिपीठ' भारतवर्ष के अज्ञात 108 एवं ज्ञात 51 पीठों में से एक है। इसका हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है।
स्थान उज्जैन, मध्य प्रदेश
देवी-देवता देवी 'मंगल चण्डिका' तथा भैरव 'मांगल्य कपिलांबर'।
संबंधित लेख शक्तिपीठ, सती
पौराणिक मान्यता मान्यतानुसार यह माना जाता है कि इस स्थान पर देवी सती की कोहनी की पतन हुआ था।
अन्य जानकारी कहते हैं कि प्राचीन मंदिर रुद्र सरोवर के तट पर स्थित था तथा सरोवर सदैव कमलपुष्पों से परिपूर्ण रहता था। इसके पश्चिमी तट पर 'देवी हरसिद्धि' का तथा पूर्वी तट पर 'महाकालेश्वर' का मंदिर था। 18वीं शताब्दी में इन मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ।

हरसिद्धि शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस शक्तिपीठ की स्थिति को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ उज्जैन के निकट शिप्रा नदी के तट पर स्थित भैरवपर्वत को, तो कुछ गुजरात के गिरनार पर्वत के सन्निकट भैरवपर्वत को वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं। अत: दोनों ही स्थानों पर शक्तिपीठ की मान्यता है।

स्थिति

हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है। भूत-भावना महाकालेश्वर की क्रीड़ा-स्थली 'अवंतिका' (उज्जैन) पावन शिप्रा के दोनों तटों पर स्थित है। यहीं पार्वती हरसिद्धि देवी का मंदिर शक्तिपीठ, रुद्रसागर या रुद्र सरोवर नाम से तालाब के निकट है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 हरसिद्धि शक्तिपीठ दर्शन (भाग 4) (हिन्दी) घुमक्कड़। अभिगमन तिथि: 25 सितम्बर, 2014।
  2. स्कंद पुराण के अवंतिका खण्ड (उज्जयिनी माहात्म्य)

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