मानस शक्तिपीठ  

मानस शक्तिपीठ हिन्दू धर्म में प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ माता सती के अंग के टुकड़े, धारण किये हुए वस्त्र और आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ पर शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। इन शक्तिपीठों का धार्मिक दृष्टि से बड़ा ही महत्त्व है। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाते हैं। ये तीर्थ पूरे भारतीय उप-महाद्वीप में फैले हुए हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है। 'मानस शक्तिपीठ' इन्हीं 51 शक्तिपीठों में से एक है।

हिंदुओं के लिए कैलास पर्वत 'भगवान शिव का सिंहासन' है। बौद्धों के लिए विशाल प्राकृतिक मण्डप और जैनियों के लिए ऋषभदेव का निर्वाण स्थल है। हिन्दू तथा बौद्ध दोनों ही इसे तांत्रिक शक्तियों का भण्डार मानते हैं। भले ही भौगोलिक दृष्टि से यह चीन के अधीन है तथापि यह हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों और तिब्बतियों के लिए अति-पुरातन तीर्थस्थान है।

नामकरण

देवी माँ का शक्तिपीठ चीन अधिकृत मानसरोवर के तट पर है, जहाँ सती की 'बायीं हथेली' का निपात हुआ था। यहाँ की शक्ति 'दाक्षायणी'[1]तथा भैरव 'अमर' हैं। 'कैलास शक्तिपीठ' मानसरोवर का गौरवपूर्ण वर्णन हिन्दू, बौद्ध, जैन धर्मग्रंथों में मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार यह ब्रह्मा के मन से निर्मित होने के कारण ही इसे 'मानसरोवर' कहा गया।[2] यहाँ स्वयं शिव हंस रूप में विहार करते हैं। जैन धर्मग्रंथों में कैलास को 'अष्टपद' तथा मानसरोवर को 'पद्महद' कहा गया है। इसके सरोवर में अनेक तीर्थंकरों ने स्नान कर तपस्या की थी। बुद्ध के जन्म के साथ भी मानसरोवर का घनिष्ट संबंध है। तिब्बती धर्मग्रंथ 'कंगरी करछक' में मानसरोवर की देवी 'दोर्जे फांग्मो'[3] यहाँ निवास कहा गया है। यहाँ भगवान देमचोर्ग, देवी फांग्मो के साथ नित्य विहार करते हैं। इस ग्रंथ में मानसरोवर को 'त्सोमफम' कहते हैं, जिसके पीछे मान्यता है कि भारत से एक बड़ी मछली आ कर उस सरोवर में 'मफम'[4] करते हुए प्रविष्ट हुई। इसी से इसका नाम 'त्सोमफम' पड़ गया। मानसरोवर के पास ही राक्षस ताल है, जिसे 'रावण हृद' भी कहते हैं। मानसरोवर का जल एक छोटी नदी द्वारा राक्षस ताल तक जाता है। तिब्बती इस नदी को 'लंगकत्सु'[5] कहते हैं। जैन-ग्रंथों के अनुसार रावण एक बार 'अष्टपद' की यात्रा पर आया और उसने 'पद्महद' में स्नान करना चाहा, किंतु देवताओं ने उसे रोक दिया। तब उसने एक सरोवर, 'रावणहृद' का निर्माण किया और उसमें मानसरोवर[6] की धारा ले आया तथा स्नान किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 'मानसे कुमुदा प्रोक्ता' के अनुसार यहाँ की शक्ति 'कुमुदा' हैं, जबकि तंत्र चूड़ामणि के अनुसार 'मानसे दक्षहस्तो में देवी दाक्षायणी हर। अमरो भैरवस्तत्र सर्वसिद्धि विधायकः॥ के अनुसार शक्ति 'दाक्षायणी' हैं।
  2. राम मनसा निर्मित परम्। ब्रह्मणा नरशार्दूल तेनेदं मानसं सरः॥(वाल्मीकि रामायण... 1/24/8-9)
  3. वज्रवाराही
  4. छबध्वनि
  5. राक्षस नदी
  6. पद्महद
  7. पांगु

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