अहमदनगर  

(अहमद नगर से पुनर्निर्देशित)


अहमदनगर
फ़रिया बाग़ महल, अहमदनगर
विवरण अहमदनगर अहमदनगर ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है जो सीना नदी के किनारे स्थित है।
राज्य महाराष्ट्र
ज़िला अहमदनगर ज़िला
संस्थापक मलिक अहमद निज़ामशाह
निर्माण काल 1490 ई.
भौगोलिक निर्देशांक 19° 4′ 48″ उत्तर, 74° 43′ 48″ पूर्व
मार्ग स्थिति मुंबई (भूतपूर्व बंबई) के 210 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।
क्षेत्रफल 39.30 वर्ग किमी
ऊँचाई 649 मीटर
जनसंख्या 3,50,905[1]
घनत्व 8,900 प्रति वर्ग किमी
हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा औरंगाबाद में है।
रेलवे स्टेशन अहमदनगर रेलवे स्टेशन
बस अड्डा महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के अनेक शहरों से जुड़ा है।
यातायात बस, टॅक्सी, कार आदि
भाषा मराठी, अंग्रेज़ी
क्या देखें मुग़ल महल, बाग़ व अहमद निज़ामशाह का क़िला
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
पिन कोड 414001
एस.टी.डी. कोड 0241
वाहन पंजीयन कोड MH 16,17
अन्य जानकारी यहाँ मुख्यतः सूती वस्त्र और चर्म-परिशोधन का उद्योग होता है। यह एक व्यावसायिक केन्द्र भी है।
बाहरी कड़ियाँ आधिकारिक वेबसाइट
अद्यतन‎

अहमदनगर, अहमदनगर ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है, यह महाराष्ट्र राज्य, सीना नदी के किनारे, मुंबई (भूतपूर्व बंबई) के 210 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। प्राचीन यादव काल में 'भीमार' नाम से जाने जाते इस नगर पर 1490 में अहमदनगर राजवंश के संस्थापक मलिक अहमद निज़ामशाह ने अपना अधिकार स्थापित किया। बाद में यह मुग़लों, मराठों और अंग्रेज़ों द्वारा शासित हुआ।

इतिहास

अहमदनगर निज़ामशाही सुल्तानों की राजधानी थी, जिन्होंने 1490 ई. में दक्खिन में बहमनी सल्तनत की एक नयी शाखा की स्थापना की। अहमदनगर की स्थापना इस वंश के पहले सुल्तान अहमद निज़ामशाह ने की। अहमदनगर का इतिहास, वहाँ की शहज़ादी और बीजापुर के अली आदिलशाह की विधवा चाँदबीबी द्वारा 1595-1596 में अकबर के पुत्र युवराज मुराद का वीरतापूर्ण प्रतिरोध तथा मलिक अम्बर की सैनिक एवं प्रशासनिक कुशलता के कारण अधिक रोचक एवं महत्वपुर्ण है। अकबर ने जब इस पर हमला किया तो, चाँदबीबी ने उसकी सेनाओं का डट कर मुकाबिला किया, परन्तु अंत में अकबर की विजय हुई। 1637 ई. में बादशाह शाहजहाँ ने अहमदनगर को मुग़ल साम्राज्य में मिला लिया और उसके बाद इस नगर का महत्त्व घट गया। यह अब भी एक बड़ा नगर है और इसी नाम के ज़िले का मुख्यालय है।

अहमदनगर क़िला

मलिक अम्बर की नीति

अहमदनगर की स्वतंत्रता बनाये रखने में मलिक अम्बर का योगदान था। यह अबीसीनियाई दास था, जो बाद में अपनी योग्यता के बल पर अहमदनगर का प्रमुख वज़ीर बना। इसने युद्ध की छापामार पद्धति को अपनाया तथा भूमि व्यवस्था में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर रैयतवाड़ी व्यवस्था (जब्त प्रणाली) को लागू किया। निज़ामशाही वंश के शासक बुरहान निज़ामशाह द्वितीय के शासन काल का प्रसिद्ध लेखक 'शाह ताहिर' हुआ। वह फ़ारसी भाषा का उत्कृष्ट विद्वान् था। उसने 'फ़तहनामा', 'इन्सा-ए-ताहिर', 'तोहफा-ए-शाही' एवं 'रिशाल-ए-पाल' नामक ग्रंथो की रचना की। अहमदनगर के निज़ामशाही राज्य में 'सैय्यद अली तबतबाई' सर्वश्रेष्ठ इतिहासकार हुआ। उसने ‘बुरहान-ए-मासीर’ नाम से निज़ामशाही वंश के सुल्तानो का इतिहास लिखा। इस पुस्तक को 'तबतबाई' ने तत्कालीन सुल्तान 'बुरहान निजामशाह द्वितीय' को समर्पित किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. Provisional Population Totals, Census of India 2011
  2. Provisional Population Totals, Census of India 2011

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