सेवाग्राम आश्रम  

सेवाग्राम आश्रम
गाँधी कुटी, सेवाग्राम आश्रम
विवरण 'सेवाग्राम आश्रम' महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित महात्मा गाँधी से सम्बन्धित प्रसिद्ध आश्रम है। गाँधीजी ने 'साबरमती आश्रम' के बाद इसकी स्थापना की थी।
राज्य महाराष्ट्र
ज़िला वर्धा
निर्माता महात्मा गाँधी
भौगोलिक स्थिति सेवाग्राम (वर्धा ज़िला, महाराष्ट्र)
प्रसिद्धि इस आश्रम में महात्मा गाँधी के जीवन से जुड़ी कई महत्त्वपूर्ण स्मृतियाँ हैं।
क्या देखें आदि निवास, बापू कुटी, बापू दफ्तर, बा कुटी, आखिरी निवास और प्रार्थना भूमि, महादेव कुटी, परचुरे कुटी, रुस्तम भवन आदि।
संबंधित लेख महात्मा गाँधी, साबरमती आश्रम, गुजरात, महाराष्ट्र
अन्य जानकारी 'सेवाग्राम आश्रम' में कई कुटियाएँ हैं, जहाँ स्वयं गाँधीजी एवं उनके सहयोगी रहा करते थे। सब कुटियाएँ अपने आप में अनोखी हैं और गाँधीजी की तत्कालीन जीवन शैली समेटे हुई हैं।
बाहरी कड़ियाँ यह कहा जाता है कि 1930 में जब गाँधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक पदयात्रा प्रारंभ की थी, तब उन्होंने शपथ ली थी कि जब तक भारत स्वतंत्र नही हो जाता, वे साबरमती में कदम नही रखेंगे।

सेवाग्राम आश्रम महाराष्ट्र राज्य के वर्धा ज़िले में स्थित सेवाग्राम नामक गाँव में है। पहले सेवाग्राम गाँव को 'शेगाँव' नाम से जाना जाता था। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ही इस गाँव का नाम बदलकर सेवाग्राम रखा। सेवाग्राम आश्रम भारत में गाँधीजी द्वारा स्थापित दूसरा महत्वपूर्ण आश्रम है। इससे पूर्व गाँधीजी ने गुजरात में साबरमती आश्रम की स्थापना की थी। ये आश्रम गाँधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों एवं उनके राजनीतिक आंदोलन आदि के संचालन का केंद्र हुआ करते थे। यह वह स्थान है, जहाँ महात्मा गाँधी 13 वर्ष, सन 1936 से 1948 तक रहे। ऐसा विश्वास है कि 1930 में जब गाँधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक पदयात्रा प्रारंभ की थी, तब उन्होंने शपथ ली थी कि जब तक भारत स्वतंत्र नही हो जाता, वे साबरमती में कदम नही रखेंगे।

स्थिति तथा प्रसिद्धि

महात्मा गाँधी का गुजरात में स्थित साबरमती आश्रम दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लेकिन उतना ही प्रसिद्ध उनका 'सेवाग्राम आश्रम' भी है, जो वर्धा (महाराष्ट्र) में स्थित है। इस आश्रम की विशेषता है कि गाँधीजी ने अपने संध्या काल के अंतिम 12 वर्ष यहीं बिताए थे। वर्धा शहर से 8 कि.मी. की दूरी पर 300 एकड़ की भूमि पर फैला यह आश्रम इतनी आत्मिक शांति देता है, जिसे शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। आश्रम की और भी कई ख़ासियत हैं। गाँधीजी ने यहाँ कई रणनीति बनाईं, कईयों से मिले और बहुतों के जीवन को नई दिशा दी। यहाँ आकर ऐसा लगता है, जैसे किसी मंदिर में पहुँच गए हों। सब कुछ शांत और सौम्य। आश्रम को समझने पर गाँधीजी का व्यक्तित्व भी समझ आ जाता है। यह आश्रम बापू के व्यक्तित्व का दर्पण है। यहाँ आकर ही पता चल जाता है कि हम एक ऐसे महान् शख्स का उठना-बैठना देख-समझ रहे हैं, जिसने भारत की आजादी का नींव रखी।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 बापू के जीवन का दर्पण- सेवाग्राम आश्रम (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 11 अक्टूबर, 2013।

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=सेवाग्राम_आश्रम&oldid=622806" से लिया गया