शनि मन्दिर, शिंगणापुर  

शनि मन्दिर, शिंगणापुर
शिंगणापुर में शनि प्रतिमा
विवरण 'शिंगणापुर का शनि मन्दिर' भारत में भगवान शनि देव के सर्वप्रमुख मन्दिरों में गिना जाता है। यह मन्दिर महाराष्ट्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
राज्य महाराष्ट्र
ज़िला अहमदनगर
प्रसिद्धि हिन्दू धार्मिक स्थल
हवाई अड्डा मुंबई, औरंगाबाद या पुणे
रेलवे स्टेशन अहमदनगर, मुंबई
यातायात एस.टी. बस, जीप, टैक्सी, ऑटो आदि।
विशेष शनि शिंगणापुर गाँव की ख़ासियत है कि यहाँ के घरों में दरवाज़े नहीं हैं। लोग घरों में कुंडी तथा कड़ी आदि लगाकर ताला नहीं लगाते। मान्यता है कि ऐसा शनि देव की आज्ञा से किया जाता है। गाँव में कहीं पर भी चोरी आदि की घटना नहीं होती।
अन्य जानकारी शनि देव के इस मन्दिर में स्त्रियों का प्रतिमा के पास जाना वर्जित है। महिलाएँ दूर से ही शनि देव के दर्शन करती हैं। सुबह हो या शाम, सर्दी हो या गर्मी, यहाँ स्थित शनि प्रतिमा के समीप जाने के लिए पुरुषों का स्नान कर पीताम्बर धारण करना अत्यावश्क है।

शिंगणापुर का शनि मन्दिर भगवान शनि देव से सम्बन्धित विख्यात धार्मिक स्थल है। हिन्दुओं का यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थान महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर ज़िले की नेवासा तालुका के गाँव शनि शिंगणापुर सोनाई में स्थित है। विश्व प्रसिद्ध इस शनि मन्दिर की विशेषता यह है कि यहाँ स्थित शनि देव की प्रतिमा बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबूतरे पर विराजित है। यह शनि मन्दिर शिरडी के साईं बाबा मन्दिर से क़रीब 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शनि शिंगणापुर गाँव की ख़ासियत यहाँ के कई घरों में दरवाजों का ना होना है। यहाँ के घरों में कहीं भी कुंडी तथा कड़ी लगाकर ताला नहीं लगाया जाता। मान्यता है कि ऐसा शनि देव की आज्ञा से किया जाता है। गाँव में कहीं पर भी चोरी आदि की घटना नहीं होती।

प्रतिमा

शिंगणापुर के इस चमत्कारी शनि मन्दिर में स्थित शनि देव की स्वयंभू प्रतिमा काले रंग की है, जो लगभग पाँच फीट नौ इंच ऊँची व लगभग एक फीट छह इंच चौड़ी है और संगमरमर के चबूतरे पर विराजमान है। यहाँ शनि देव अष्ट प्रहर धूप हो, आँधी हो, तूफान हो या जाड़ा हो, सभी ऋतुओं में बिना छत्र धारण किए खड़े हैं। राजनेता व प्रभावशाली वर्गों के लोग भी यहाँ नियमित रूप साधारण भक्तों के समान ही दर्शनार्थ प्रतिदिन आते हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु यहाँ आकर शनि देव की इस दुर्लभ प्रतिमा का दर्शन लाभ लेते हैं। यहाँ शनि देव की साकार मूर्ति रूप न होकर एक बड़ी काली शिला के रूप में हैं, जिसे स्वयंभू माना जाता है। इसके पीछे एक प्रचलित कथा है कि भगवान शनि देव के रूप में यह शिला एक गडरिये को मिली थी। उस गडरिये से स्वयं शनि देव ने कहा कि इस शिला के लिए बिना कोई मंदिर बनाए इसी खुले स्थान पर इस शिला का तेल अभिषेक और पूजा-अर्चन शुरू करे। तब से ही यहाँ एक चबूतरे पर शनि के पूजन और तेल अभिषेक की परंपरा जारी है।

लोक कथा

यहाँ एक लोक कथा के अनुसार एक बार शनि देव एक ब्राह्मण के घर कुष्ट रोगी बनकर आए। उस ब्राह्मण की तीन बहुएँ थीं। जिनमें से दो ने शनि देव को रोगी मानकर उपेक्षित किया। किंतु तीसरी बहू ने शनि देव की सेवा कर धर्म निभाया, जिससे शनि देव ने प्रसन्न होकर उसके सारे मनोरथ पूरे किए और उन दोनों बहुओं को गलत भावों के कारण दु:ख सहन करना पड़े।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. शनि देव का धाम- शनि शिंगणापुर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 16 सितम्बर, 2013।
  2. शनि मन्दिर, शिंग्लापुर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 16 सितम्बर, 2013।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=शनि_मन्दिर,_शिंगणापुर&oldid=511145" से लिया गया