रोहणखेड़  

रोहणखेड़ बरार, महाराष्ट्र का ऐतिहासिक स्थान है। यह खामगांव से 8 मील की दूरी पर स्थित है। राष्ट्रकूट नरेशों के समय में यह प्रख्यात नगर था।

  • प्राचीन मंदिरों के ध्वंसावशेष अब भी रोहणखेड़ में देखे जा सकते हैं। इन मंदिरों में भगवान शिव का मंदिर प्रमुख है। इसकी छत सपाट, स्तंभ चतुष्कोण और षटकोण तथा गर्भगृह पर्याप्त विस्तीर्ण है।[1]
  • शिव मंदिर के तोरण पर बेलबूटों की शानदार नक़्क़ाशी बड़ी मनोहर है।
  • मंदिर के निकट एक चट्टान पर एक भग्न अभिलेख है, जिसमें केवल ‘तदन्वये भूपतिः कूटः’ शब्द शेष है। इससे प्रकट होता है कि यह मंदिर राष्ट्रकूटों के समय में बना था।
  • एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर जो राष्ट्रकूटों के समय में बना था, रोहणखंड के मंदिर से मिलता जुलता है। इस मंदिर के पाषाणों को सुदृढ़ रूप से जोड़ने के लिए उनके बीच-बीच में तांबे की शलाकाएं जड़ी हुई हैं। बरामदे में शेषशायी भगवान विष्णु की मूर्ति अंकित है, जो स्थापत्य कला की दृष्टि से बहुत सुन्दर है।[1]
  • रोहणखेड़ के खंडहरों से मध्यकालीन जैन मूर्तियों के भी खंडित अवशेष प्राप्त हुए हैं।
  • अपभ्रंश भाषा के कवि पुष्पदंत इसी स्थान के निवासी कहे जाते हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि यही पुष्पदंत 'महिम्नस्तोत्र' के रचियता थे।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 804 |

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