आद्यपक्षी  

आद्यपक्षी पक्षियों के विकास का इतिहास अन्य सभी जंतुसमूहों के विकास के इतिहास से अधिक दुर्बोध है। जिस काल तक भूविज्ञान पहुँच सका है उसमें आद्यपक्षी का कोई उपयुक्त प्रमाण प्राप्त नहीं है। प्रादिनूतन के प्रारंभिक भाग के (अब से लगभग करोड़ वर्ष पूर्व के) पक्षियों के जीवाश्म (फ़ॉसिल) बहुत कम प्राप्त हुए हैं। खटीयुग (कृटेशस युग) के बाद केवल आठ प्रतिनिधि मिले हैं, परंतु सब आदर्शभूत नहीं हैं और अपूर्ण भी हैं।

इनमें सबसे अच्छा अवशेष हैस्प्रौरनिस नामक पक्षी का है। यह तैरनेवाली चिड़िया थी। इसके पंख छोटे थे। इसकी उरोस्थि (स्टर्नम) पर कूट (अंग्रेेजी में कील) था। इक्थियोर्निस नामक पक्षी का अवशेष भी अच्छा है। यह कबूतर के बराबर एक छोटी उड़नेवाली चिड़िया थी, जिसका उरकूट (कील) बड़ा था। इन दोनों चिड़ियों के जबड़ों पर पूर्णतया विकसित दाँत थे। परंतु इन दोनों के जीवाश्मों में से कोई एक भी पक्षियों के विकास पर प्रकाश नहीं डालता। इनसे यह पता अवश्य चलता है कि उड़ना इनसे पहले प्रारंभ हो चुका था। पक्षियों के विकास के अध्ययन के लिए पुरानी चट्टानों का अध्ययन आवश्यक है।

पूर्वी जर्मनी के सोलनहाफ़न नामक स्थान पर महासरट (जुरासिक) काल की महीन दानेवाली चूने की चट्टानें हैं। किसी समय में यह पत्थर लीथो की छपाई के लिए खोदा जाता था। इन पत्थरों का पूरा निरीक्षण किया जाता था, इसलिए इन पर अंकित सभी चिह्नों की जाँच होती रहती थी। सन्‌ 1861 के प्रारंभ में एक पत्थर में पर (फ़ेदर) की एक छाप मिली। इससे कर्मचारी बहुत चकित हुए। इसके कुछ समय बाद ही पंखों से सुसज्जित एक प्राणी का कंकाल पत्थर के बीच में मिला। यह पापनहाइम नामक गाँव के पास लांगेनलथइमर हार्ट में मिला। पापनहाइम में डाक्टर अर्न्स्ट हाबलाईन रहते थे। उन्होंने अपने संग्रह के लिए दोनों शिलाएँ ले लीं। तत्पश्चात्‌ हरमन फ़ॉन मेयर ने परवाली छाप का नाम आर्कियोप्टैरिक्स लिथोग्राफ़िका रखा। इस नाम का अर्थ है 'लिथो के पत्थर का पुराना पर'। दूसरी शिला पर अंकित जो कंकाल सहित पर का चिह्न था वह किसी दूसरे आद्यपक्षी का था। उसमें खोपड़ी स्पष्ट नहीं थी, परंतु पखं और पूँछ की छाप बहुत अच्छी थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 371-72 |

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=आद्यपक्षी&oldid=630632" से लिया गया