गंगा डॉल्फ़िन  

गंगा डॉल्फ़िन
गंगा डॉल्फ़िन
जगत एनिमेलिया (Animalia)
संघ कॉर्डेटा (Chordata)
वर्ग मैमेलिया (Mammalia)
गण सिटेसी (Cetacea)
उपगण ओडोंटोसेटी (Odontoceti)
कुल इनीडी (Iniidae)
जाति प्लेटेनिस्टा (Platanista)
प्रजाति गेंगेटिका (gangetica)
द्विपद नाम प्लेटेनिस्टा गेंगेटिका (Platanista gangetica)
अन्य नाम अंग्रेज़ी- 'प्‍लेटेनिस्‍टा गेंगेटिका', हिन्दी- 'सुसु', बांग्ला- 'सुसक' या 'सिसुक', संस्कृत- 'सिसुमार'।
प्रजनन समय जनवरी से जून तक। यह एक बार में सिर्फ़ एक बच्चे को ही जन्म देती है।
अन्य जानकारी गंगा नदी में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन भारत की एक महत्‍वपूर्ण संकटग्रस्त प्रजाति है, इसलिए इसे 'वन्‍य जीवन (संरक्षण) अधिनियम', 1972 में शामिल किया गया है।

डॉल्फ़िन, राष्‍ट्रीय जलीय जीव

गंगा डॉल्फ़िन (Platanista gangetica) तथा सिंधु नदी डॉल्फ़िन (Platanista gangetica minor) गंगा तथा सिंधु नदी में पाई जाने वाली मीठे पानी की डॉल्फ़िन की दो प्रजातियाँ हैं। ये भारत, बांग्लादेश, नेपाल तथा पाकिस्तान में पाई जाती हैं। गंगा नदी डॉल्फ़िन सभी देशों की नदियों के जल, मुख्यतः गंगा नदी में तथा सिंधु नदी डॉल्फ़िन, पाकिस्तान के सिंधु नदी के जल में पाई जाती हैं। भारत में डॉल्फ़िन गंगा और उसकी सहायक नदियों के अलावा ब्रह्मपुत्र और मेघना नदी में भी पाई जाती है। यह मछली नहीं दरअसल एक स्तनधारी जीव है। मादा डॉल्फ़िन की औसत लम्बाई नर डॉल्फ़िन से अधिक होती है।

निवास स्थान

डॉल्फ़िन की प्रजाति को भारत, नेपाल, भूटान और बंगलादेश की गंगा, मेघना और ब्रह्मपुत्र नदियों में तथा बंगलादेश की कर्णफूली नदी में देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश के ज़िले: मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद, गाजियाबाद और बुलन्दशहर में बह रही गंगा नदी में डॉल्फ़िनें रहती हैं। बिजनौर बैराज से लेकर नरौरा बैराज तक 165 किमी के जल क्षेत्र में यह पायी जाती हैं। गढ़ से लेकर नरौरा तक के 86 किमी तक का क्षेत्र रामसर क्षेत्र घोषित है, जिसमें यह प्रजनन भी करती हैं। उनकी संख्या बढ़ाने के लिए अब यहाँ प्रयास भी किए जा रहे हैं। सेवियर्स संस्था की सचिव स्वाति शर्मा और विश्व प्रकृति निधि के अधिकारियों के अनुसार, तो रामसर साइट में वर्ष 2005 में डॉल्फ़िनो की संख्या 35 थी, जो वर्ष 2010 में बढ़कर 53 हो गई है। डॉल्फ़िनों के व्यवहार को जानने के लिए टोक्यो यूनिवर्सिटी, जापान और आईआईटी जैसे संस्थान शोध भी कर रहे हैं और इसी के लिए बुलंदशहर के कर्णबास में गंगा नदी के अंदर विभिन्न प्रकार के उपकरण भी लगाए गए हैं।

उत्तर भारत की पांच प्रमुख नदियों- यमुना नदी, चंबल नदी, सिंधु नदी, कावेरी नदी व पहुज के संगम स्थल 'पंचनद स्थल' को डॉल्फ़िन के लिये सबसे ख़ास समझा जा रहा है, क्योंकि यहाँ पर एक साथ 16 से अघिक डॉल्फ़िनों को एक समय में एक साथ पर्यावरण विशेषज्ञों ने देखा है। इसी आधार पर देश भर के वैज्ञानिक 'पंचनद स्थल' को देश के डॉल्फ़िनों के लिए संरक्षित करने की मांग कर रहे थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

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