हीर राँझे दे हो गए मेले -बुल्ले शाह  

हीर राँझे दे हो गए मेले -बुल्ले शाह
बुल्ले शाह
कवि बुल्ले शाह
जन्म 1680 ई.
जन्म स्थान गिलानियाँ उच्च, वर्तमान पाकिस्तान
मृत्यु 1758 ई.
मुख्य रचनाएँ बुल्ले नूँ समझावन आँईयाँ, अब हम गुम हुए, किते चोर बने किते काज़ी हो
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
बुल्ले शाह की रचनाएँ
  • हीर राँझे दे हो गए मेले -बुल्ले शाह

हीर राँझे दे हो गए मेले,
भुल्ली हीर ढूँढ़ेदी बेले,
राँझा यार बग़ल विच खेले,
मैनू सुध-बुध रही ना काई।


हिन्दी अनुवाद

हीर और राँझा का मिलन हो गया।
हीर तो उसे ढूँढ़ने के लिए भटकती रही
किन्तु प्रियतम राँझा तो उसकी बगल में ही खेल रहा था
मैं तो अपनी सब सुध-बुध खो बैठी थी।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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