किससे परदा रखते हो? -बुल्ले शाह  

किससे परदा रखते हो? -बुल्ले शाह
बुल्ले शाह
कवि बुल्ले शाह
जन्म 1680 ई.
जन्म स्थान गिलानियाँ उच्च, वर्तमान पाकिस्तान
मृत्यु 1758 ई.
मुख्य रचनाएँ बुल्ले नूँ समझावन आँईयाँ, अब हम गुम हुए, किते चोर बने किते काज़ी हो
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
बुल्ले शाह की रचनाएँ
  • किससे परदा रखते हो? -बुल्ले शाह

पर्दा किसतों राखी दा
कियों ओहले बह बह झाँकी दा,
पहले आप साजन साजी दा,
हुण दसना ऐं सबक़ नमाज़ी दा,
हुन आया आप नज़ारे नूं,
विच लैली बन झाँकी दा ।।1।।

शाह शमस दी खाल लहायो,
मंसूर नूं च सूली दिवायो,
ज़क्रीए सिर कल्क्तर धरायो,
कि लिख्या रह गया बाक़ी दा? ।।2।।

कुन किहा फ़ैकुन कहाया,
बेचुनी दा चुन बस्साए,
खातर तेरी जोगत बणाया,
सिर पर छतर लौकाई दा ।।3।।

कुण साडी वल धाया हैं,
न रहन्दा छप्पा छपाया है,
किते बुल्ला नाम धराया हैं,
विच ओहला रख्या खाकी दा ।।4।।


हिन्दी अनुवाद

पहले खुद को यार बनाते हो
फिर शरत-ऐ-नमाज़ लगाते हो
जब जौक-ऐ-नमूद सताता है
फिर लैला बन बन आते हो

किस से पर्दा रखते हो
क्यों ओट में बेठ के तकते हो

शाह-शमस की खाल खिंचवाई
मंसूर को सूली गढ़वाई
ज़करीया सिर आरी भी चलवाई
अब क्या रह गया लेखा बाकी

किस से पर्दा रखते हो
क्यों ओट में बेठ के तकते हो

अपनी सिमत जो तुम हो आये
छुप कर भी नहीं अब छुप सकते
नाम भी को रखवाया बुल्ला
और खाकी चोला भी पहना

किस से पर्दा रखते हो
क्यों ओट में बेठ के तकते हो

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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