ना कहूँ जब की, ना कहूँ तब की -बुल्ले शाह  

ना कहूँ जब की, ना कहूँ तब की -बुल्ले शाह
बुल्ले शाह
कवि बुल्ले शाह
जन्म 1680 ई.
जन्म स्थान गिलानियाँ उच्च, वर्तमान पाकिस्तान
मृत्यु 1758 ई.
मुख्य रचनाएँ बुल्ले नूँ समझावन आँईयाँ, अब हम गुम हुए, किते चोर बने किते काज़ी हो
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
बुल्ले शाह की रचनाएँ
  • ना कहूँ जब की, ना कहूँ तब की -बुल्ले शाह

ना कहूँ जब की, ना कहूँ तब की,
बात कहूँ मैं अब की,
अगर ना होते गुरु गोविन्द सिंह,
सुन्नत होती सभ की।


हिन्दी अनुवाद

मैं अतीत की बात नहीं कहता
मैं वर्तमान की बात करता हूँ
यदि गुरू गोविन्द सिंह नहीं होते,
हर व्यक्ति तब मुस्लिम होता।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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