मिलिन्दपन्ह  

नागसेन

नागसेन के जीवन के बारे में "मिलिन्द प्रश्न"[1] में जो कुछ मिलता है, उससे इतना ही मालूम होता है, कि हिमालय-पर्वत के पास पंजाब में कजंगल गाँव में सोनुत्तर ब्राह्मण के घर में उनका जन्म हुआ था। पिता के घर में ही रहते उन्होंने ब्राह्मणों की विद्या वेद, व्याकरण आदि को पढ़ लिया था। उसके उनका परिचय उस वक्त वत्तनीय (वर्त्तनीय) स्थान में रहते एक विद्वान् भिक्षु रोहण से हुआ, जिससे नागसेन बौद्ध-विचारों की ओर झुके। रोहण के शिष्य बन वह उनके साथ विजम्भवस्तु[2] होते हिमालय में रक्षिततल नामक स्थान में गये। वहीं गुरु ने उन्हें उस समय की रीति के अनुसार कंठस्थ किये सारे बौद्ध वांड्मय को पढाया।

मिलिन्द (मिनाण्डर)

उत्तर-पश्चिम भारत का 'हिन्दी-यूनानी' राजा 'मनेन्दर' 165-130 ई. पू. लगभग, भारतीय उल्लेखों के अनुसार 'मिलिन्द' था, वह प्रथम पश्चिमी राजा था जिसने बौद्ध धर्म अपनाया और बैक्ट्रिया, पंजाब, हिमाचल, जम्मू से मथुरा तक शासन किया । मिनान्डर नामक यवन राजा के भी अनेक सिक्के उत्तर - पश्चिमी भारत में उपलब्ध हुए हैं।

मिनान्डर की राजधानी शाकल[3] थी। भारत में राज्य करते हुए वह बौद्ध श्रमणों के सम्पर्क में आया और आचार्य नागसेन से उसने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। बौद्ध ग्रंथों में उसका नाम 'मिलिन्द' आया है। 'मिलिन्द पञ्हो' नाम के पालि ग्रंथ में उसके बौद्ध धर्म को स्वीकृत करने का विवरण दिया गया है। मिनान्दर को शास्त्र चर्चा और बहस की बड़ी आदत थी, और साधारण पंडित उसके सामने नहीं टिक सकते थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

दर्शन दिग्दर्शन |लेखक: राहुल सांकृत्यायन |प्रकाशक: किताब महल, इलाहाबाद |पृष्ठ संख्या: 422-430 |ISBN: 81-225-0027-7

  1. 'मिलिन्द प्रश्न, अनुवादक भिक्षु जगदीश काश्यप, 1637 ई.
  2. वर्त्तनीय, कंगजल और शायद विजम्भवस्तु भी स्यालकोट के ज़िले में थे।
  3. सियालकोट
  4. मठ
  5. जो शायद यूनानी दिमित्री है
  6. मन और भौतिक तत्त्व
  7. मिलिन्द-प्रश्न, 2।9 (अनुवाद, पृष्ठ 30-34)
  8. स्वामिन
  9. आत्मा
  10. सदाचार
  11. भौतिक तत्त्व
  12. पाँचों स्कंध
  13. ईषा
  14. भारत
  15. संयुत्तनिकाय, 5।10।6
  16. संयुत्तनिकाय, 3।4।44 (अनुवाद, पृष्ठ 110)
  17. Mind.
  18. Matter
  19. वही, 2।2।14 (अनुवाद, पृष्ठ 57-60)
  20. संयुत्तनिकाय, 2।2।9 (अनुवाद, पृ.49)
  21. चेतना
  22. संयुत्तनिकाय
  23. संयुत्तनिकाय, 3।1।6 (अनुवाद, पृ. 85)
  24. बन्द
  25. उपादान
  26. आवागमन
  27. संयुत्तनिकाय, 3।2।18 (अनुवाद, पृ. 91)

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