ओह प्यारे! यूँ मन को मोहना कोई तुमसे सीखे ये मनमोहक छवि तुम्हारी देख - देख मैं तो दिल हारी सांवरिया ! ये मधुर मुस्कान तुम्हारी जैसे हो कोई तीखी कटारी कितने सहज, सरल , सलोने रूप हैं तिहारे इस मधुर रूप रस का पान करते नैन हमारे निश्छल , निर्मल रूप धारे कैसे बैठे हो मधुबन में प्यारे इस लजीली , रसीली बाँकी छवि पर तिहारी मैं तो खुद को वारूँ प्यारे ओ नटखट चितचोर हमारे कैसे सुन्दर रूप तुम्हारे हम तो अपना सब कुछ हारे ………