हुमायूँ का मक़बरा  

(हुमायूं का मक़बरा से पुनर्निर्देशित)


हुमायूँ का मक़बरा
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विवरण हुमायूँ का मक़बरा नई दिल्ली के दीनापनाह अर्थात पुराने क़िले के निकट संत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह के पास मथुरा मार्ग के निकट यमुना नदी के किनारे स्थित है। हुमायूँ का मक़बरा मुग़ल स्थापत्य कला या मुग़ल वास्तुकला से सम्बंधित है।
केन्द्र शासित प्रदेश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली
निर्माण काल 1565-1572
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 28°36′36, पूर्व- 77°13′48
प्रसिद्धि यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में शामिल हुमायूँ का मक़बरा भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।
हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा
रेलवे स्टेशन पुरानी दिल्ली, नई दिल्ली, हज़रत निज़ामुद्दीन
यातायात साईकिल रिक्शा, ऑटो रिक्शा, टैक्सी, लोकल रेल, मेट्रो रेल, बस
कहाँ ठहरें होटल, धर्मशाला, अतिथि ग्रह
एस.टी.डी. कोड 011
सावधानी लावारिस वस्तुओं को ना छुएं, शीत ऋतु में कोहरे से और ग्रीष्म ऋतु में लू से बचाव करें।
Map-icon.gif गूगल मानचित्र, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा
संबंधित लेख लाल क़िला, इण्डिया गेट, जामा मस्जिद, राष्ट्रपति भवन
अद्यतन‎

हुमायूँ का मक़बरा नई दिल्ली के 'दीनापनाह' अर्थात पुराने क़िले के निकट संत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह के पास मथुरा मार्ग के निकट यमुना नदी के किनारे स्थित है। हुमायूँ का मक़बरा मुग़ल स्थापत्य कला या मुग़ल वास्तुकला से सम्बंधित है। हुमायूँ एक महान् मुग़ल बादशाह था जिसकी मृत्यु शेर मंडल पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिर कर हुई थी। हुमायूँ का मक़बरा उनकी पत्नी हाजी बेगम ने हुमायूँ की याद में हुमायूँ की मृत्यु के आठ साल बाद बनवाया था। ग़ुलाम वंश के समय में यह भूमि किलोकरी क़िले में स्थित थी, जो कि नसीरूद्दीन महमूद (शासन 1246-1266 ई.) के पुत्र सुल्तान केकूबाद की राजधानी थी। यह समूह विश्व धरोहर घोषित है, एवं भारत में मुग़ल वास्तुकला का प्रथम उदाहरण है। इस मक़बरे की शैली वही है, जिसने ताजमहल को जन्म दिया।

1562 से 1572 के बीच बना यह मक़बरा दिल्ली के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। वास्तुकार मिराक मिर्ज़ा ग़ियात की छाप साफ़ देखी जा सकती है। यहाँ बाद में मुग़लों के शाही परिवार के कई सदस्यों को दफ़नाया गया। इस जगह पर हमीदा बेगम (अकबर की मां), दारा शिकोह (शाहजहाँ का बेटा) और बहादुर शाह ज़फ़र द्वितीय (अंतिम मुग़ल शासक) का मक़बरा भी है। यही मक़बरा विश्व विख्यात ताजमहल के निर्माण की प्रेरणा बना। इस मक़बरे का प्रभाव ताजमहल पर भी देखा जा सकता है। यूनेस्‍को ने इसे विश्‍व धरोहर का दर्जा दिया है। इस मक़बरे की देखरेख भारतीय पुरातत्त्व विभाग करता है। यह पहली जगह है जहाँ मक़बरे के साथ-साथ पार्क भी स्थित हैं। यहाँ भारतीय परम्परा एवं पारसी शैली की वास्तुकला का अदभुत संगम देखने को मिलता है।

निर्माण

इस धरोहर का निर्माण 1565 से 1572 ईसवी के बीच फ़ारसी वास्तुविद् मिराक मिर्ज़ा ग़ियात के डिजाइन पर हुआ था। ताजमहल जैसी कलात्मक नजीर पेश करने वाला यह मक़बरा 12,000 वर्ग मीटर के चबूतरे पर बना है जिसकी उँचाई 47 मीटर है। हमायूँ मक़बरे के केन्द्रीय कक्ष की आंतरिक सज्जा बढ़िया कालीनों व गलीचों से परिपूर्ण है। मक़बरे में क़ब्रों के ऊपर एक शुद्ध श्वेत शामियाना लगा होता था और उनके सामने ही पवित्र ग्रंथ रखे रहते थे। इनके साथ ही हुमायूँ की पगड़ी, तलवार और जूते भी रखे रहते थे।

हुमायूँ का मक़बरा, दिल्ली
Humayun's Tomb, Delhi

मृत्य के उपरांत

हुमायूँ को उसकी मृत्यु के बाद दिल्ली में ही दफ़नाया गया, और इसके बाद में हुमायूँ को 1558 में खंजरबेग द्वारा पंजाब के सरहिंद ले जाया गया। कालांतर में 1571 में मुग़ल सम्राट अकबर ने अपने पिता की समाधि के दर्शन किये थे। 1562 में हुमायूँ की मृत्यु के 9 वर्ष बाद हुमायूँ के मक़बरे का निर्माण उसकी पत्नी हमीदा बानो बेगम के आदेश के अनुसार हुआ था। उस समय इस इमारत की लागत 15 लाख रुपये आयी थी।

मक़बरे के निर्माण का स्थान

हुमायूँ के मक़बरे के निर्माण के लिए यमुना नदी के किनारे के स्थान का चुनाव किया गया। इस स्थान का चुनाव मक़बरे के निकट स्थित हजरत निजामुद्दीन की दरगाह से निकटता के कारण किया गया था। दिल्ली के प्रसिद्ध सूफी संत हजरत निजामुद्दीन का तत्कालीन आवास भी मक़बरे के स्थान से उत्तर-पूर्व दिशा में निकट ही चिल्ला-निजामुद्दीन औलिया में स्थित था।[1]

फ़ारसी वास्तुकला से प्रभावित

Blockquote-open.gif इस धरोहर का निर्माण 1565 से 1572 ईसवी के बीच फ़ारसी वास्तुविद् मिराक मिर्ज़ा ग़ियात के डिजाइन पर हुआ था। Blockquote-close.gif

यह मक़बरा फ़ारसी वास्तुकला से प्रभावित है, यह 47 मीटर ऊँचा और 200 फीट चौड़ा है। इस इमारत पर फ़ारसी बल्बुअस गुम्बद बना है, जो सर्वप्रथम सिकन्दर लोदी के मक़बरे में देखा गया था। गुम्बद दोहरी पर्त में बना है, बाहरी पर्त के बाहर श्वेत संगमरमर का आवरण लगा है, और अंदरूनी पर्त गुफ़ा रूपी बनी है। गुम्बद के शुद्ध और निर्मल श्वेत रूप से अलग शेष इमारत लाल बलुआ पत्थर की बनी है, जिस पर श्वेत और काले संगमरमर तथा पीले बलुआ पत्थर से पच्चीकारी का काम किया गया है। यह गुम्बद 42.5 मीटर के ऊँचे गर्दन रूपी बेलन पर बना है। गुम्बद के ऊपर 6 मीटर ऊँचा पीतल का किरीट कलश स्थापित है, और उसके ऊपर चंद्रमा लगा हुआ है, जो तैमूर वंश के मक़बरों में मिलता है। इन रंगों का संयोजन इमारत को एक ख़ूबसूरती देता है।[1]

वास्तुकार

अब्दुल क़ादिर बदायूंनी नाम के एक समकालीन इतिहासकार के अनुसार इस मक़बरे का स्थापत्य फ़ारसी वास्तुकार मिराक मिर्ज़ा ग़ियात ने किया था, जिन्हें इस इमारत के लिये अफ़ग़ानिस्तान के हेरात शहर से विशेष रूप से बुलवाया गया था। इन्होंने भारत की भी कई इमारतों की अभिकल्पना की थी। वे इस मक़बरे के पूरा होने से पहले ही चल बसे, किंतु उनके पुत्र ने अपने पिता का कार्य पूर्ण किया और हुमायूँ का मक़बरा 1571 में बनकर पूर्ण हुआ। यहाँ सर्वप्रथम लाल बलुआ पत्थर का इतने बड़े स्तर पर प्रयोग हुआ था। युनेस्को द्वारा 1993 में इस इमारत समूह को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

प्रेरणा

हमायूँ के मक़बरे में मुग़ल स्थापत्य में चारबाग़ शैली के उद्यान प्रमुख अंग थे। इससे पूर्व ऐसे उद्यान भारत में कभी भी नहीं दिखे थे और इसके बाद अनेक इमारतों का अभिन्न अंग बनते गये। हुमायूँ का मक़बरा इसके के पिता बाबर के क़ाबुल स्थित मक़बरे 'बाग़ ए बाबर' से बिल्कुल अलग था। मुग़ल सम्राटों को बाग़ में बने मक़बरों में दफ़न करने की परंपरा बाबर के साथ ही आरंभ हुई थी। तैमूर लंग के समरकंद में बने मक़बरे पर आधारित यह मक़बरा भारत में आगे आने वाली मुग़ल स्थापत्य के मक़बरों की प्रेरणा बना।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 1.4 1.5 1.6 हुमायूँ का मक़बरा (हिन्दी) वेब वार्ता। अभिगमन तिथि: 11 मई, 2011

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