इंदिरा पर्यावरण भवन  

इंदिरा पर्यावरण भवन
इंदिरा पर्यावरण भवन
विवरण 'इंदिरा पर्यावरण भवन' भारत की ऐसी पहली और अकेली इमारत है जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक ऊर्जा पर निर्भर है।
देश भारत
क्षेत्र नई दिल्‍ली
शिलान्यास पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा
अन्य जानकारी इस इमारत को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि दिन के प्रकाश का 75 फीसदी इस्तेमाल ऊर्जा खपत में कमी लाने में सहायक हो सके।

इंदिरा पर्यावरण भवन (Indira Paryavaran Bhawan) भारत की ऐसी पहली और अकेली इमारत है जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक ऊर्जा पर निर्भर है। इस इमारत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ऑफिस के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए बाहरी ऊर्जा (बिजली) की जरूरत नहीं है। इसकी छत पर देश का सबसे बड़ा सोलर सिस्टम लगा है। तत्कालीन पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इसका शिलान्यास किया था। यह 7 मंजिला इमारत तकरीबन 32 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनी है। इस इमारत की लागत 209 करोड़ रुपए आई है। पूरी तरह भूकंपरोधी इस इमारत के एक चौथाई हिस्से में पेड़ रोपे गए हैं और विशेष रूप से घास भी उगाई है।

उद्देश्य

इंदिरा पर्यावरण भवन की योजना आधुनिक लैंडमार्क भवन के रूप में की गई, जिसमें विपरीत पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए प्राकृतिक क्षेत्रों और वृक्षों के संरक्षण, पर्याप्‍त प्राकृतिक रोशनी उपलब्‍ध कराने, परिवेशी तापमान को कम करने के लिए छायादार लैंडस्‍केप्‍ड क्षेत्रों, अधिकतम ऊर्जा बचत प्रणाली एवं हरित भवन संकल्‍पना द्वारा न्‍यूनतम प्रचालन लागत, अपशिष्‍ट जल के पुनर्चक्रण द्वारा जल का पुन: उपयोग सहित, जल आवश्‍यकताओं का संरक्षण इष्‍टतमीकरण और शारीरिक अक्षम व्‍यक्तियों के लिए भवन को अनुकूल बनाने पर बल देना है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग (हिंदी) bhaskar.com। अभिगमन तिथि: 20 जनवरी, 2018।

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