खैरुल्बयान  

खैरुल्बयान का अर्थ 'सुकथा' है। इसे कवि पीर रोशनाई ने लिखा था, जिन्हें 'पीर तारीकी' (अंधकार गुरु) भी कहते हैं। मुल्ला बदायूँनी के अनुसार इन्होंने अफ़ग़ानों में जाकर बहुत से बेवकूफों को चेला मूँड़ा एवं अपनी बेदीनी और बदमज़हबी को रौनक दी।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अकबर |लेखक: राहुल सांकृत्यायन |प्रकाशक: किताब महल, इलाहाबाद |पृष्ठ संख्या: 294 |

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