सूर्यमल्ल मिश्रण  

सम्मान

महाराज बूँदी के अतिरिक्त राजस्थान और मालवा के अन्य राजाओं ने भी सूर्यमल्ल मिश्रण का यथेष्ट सम्मान किया। सूर्यमल्ल मिश्रण ने 'वंश भास्कर' नामक अपनी पिंगल काव्य रचना में बूँदी राज्य के विस्तृत इतिहास के साथ-साथ उत्तरी भारत का इतिहास तथा राजस्थान में मराठा विरोधी भावना का उल्लेख किया है। वे चारणों की मिश्रण शाखा से संबद्ध थे। वे वस्तुत: राष्ट्रीय-विचारधारा तथा भारतीय संस्कृति के कवि थे।

निधन

ऐश्वर्य तथा विलासिता का उपभोग करने वाले कवि सूर्यमल्ल मिश्रण की ख़ास विशेषता यह थी कि इनके काव्य पर इसका विपरीत प्रभाव नहीं पड़ सका है। इनकी श्रृंगारपरक रचनाएँ भी संयमित एवं मर्यादित हैं। विक्रम संवत 1920 (1863 ई.) में इनका निधन हो गया।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. राजस्थानी साहित्य से सम्बंधित प्रमुख साहित्यकार (हिन्दी) राजस्थान अध्ययन। अभिगमन तिथि: 05 अगस्त, 2014।

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