प्रेम चरचा है अरचा है -देव  

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प्रेम चरचा है अरचा है -देव
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कवि देव
जन्म सन 1673 (संवत- 1730)
मृत्यु सन 1768 (संवत- 1825)
मुख्य रचनाएँ भाव-विलास, भवानी-विलास, कुशल-विलास, रस-विलास, प्रेम-चंद्रिका, सुजान-मणि, सुजान-विनोद, सुख-सागर
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
देव की रचनाएँ
  • प्रेम चरचा है अरचा है -देव

रेम चरचा है अरचा है कुल नेमन रचा है
 
चित और अरचा है चित चारी को ।
छोड़्यो परलोक नरलोक बरलोक कहा
 
हरष न सोक ना अलोक नर नारी को ।
घाम सीत मेह न बिचारै देह हूँ को देव
 
प्रीति ना सनेह डरु बन ना अँध्यारी को ।
भूलेहू न भोग बड़ी बिपति बियोग बिथा
 
जोगहू ते कठिन सँजोग परनारी को ।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

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