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अंकास्य

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अंकास्य - संज्ञा पुल्लिंग (संस्कृत अङ्कास्य)[1]

अंक के अंत में प्रविष्ट किसी पात्र के द्वारा विच्छिन्न अतीत कथा का आगामी संसूचक अंश।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिंदी शब्दसागर, प्रथम भाग |लेखक: श्यामसुंदरदास बी. ए. |प्रकाशक: नागरी मुद्रण, वाराणसी |पृष्ठ संख्या: 02 |
  2. साहित्य दर्पण, दश.

बाहरी कड़ियाँ

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