ज़ोहरा सहगल  

ज़ोहरा सहगल
ज़ोहरा सहगल
पूरा नाम साहिबजादी ज़ोहरा बेगम मुमताजुल्ला ख़ान
प्रसिद्ध नाम ज़ोहरा सहगल
जन्म 27 अप्रैल 1912
जन्म भूमि रामपुर, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 10 जुलाई, 2014 (102 वर्ष)
मृत्यु स्थान दिल्ली, भारत
अभिभावक पिता- मुमताजुल्ला ख़ान और माता- नातीक बेगम
पति/पत्नी कामेश्वर नाथ सहगल
संतान पवन (पुत्र), किरण (पुत्री)
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनेत्री, नृत्यांगना
मुख्य फ़िल्में 'भाजी ऑन द बीच', 'दिल से', 'ख्वाहिश', 'हम दिल दे चुके सनम', 'बेण्ड इट लाइक बेकहम', 'साया', 'चिकन टिक्का मसाला', 'मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेज', 'वीर-जारा' आदि।
पुरस्कार-उपाधि पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी सम्मान, राष्ट्रीय कालिदास सम्मान
प्रसिद्धि ज़ोहरा सहगल पहली ऐसी भारतीय हैं, जिसने सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय मंच का अनुभव किया। उन्होंने 1960 के दशक के मध्य में रूडयार्ड किपलिंग की 'द रेस्कयू ऑफ प्लूफ्लेस' में काम किया।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी ज़ोहरा सहगल ने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थियेटर में क़रीब 14 साल तक काम किया।

ज़ोहरा सहगल (अंग्रेज़ी: Zohra Sehgal, जन्म: 27 अप्रैल, 1912; मृत्यु: 10 जुलाई 2014) प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं रंगमंच कलाकार थीं। इनका मूल नाम 'साहिबजादी ज़ोहरा बेगम मुमताजुल्ला ख़ान' है। थियेटर को अपना पहला प्यार मानने वाली ज़ोहरा ने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थियेटर में क़रीब 14 साल तक काम किया। इस दौरान उन्होंने कई फ़िल्मों में भी काम किया। जिनमें हम दिल दे चुके सनम, बेंड इट लाइक बेकहम और चीनी कम जैसी फ़िल्में शामिल हैं। ज़ोहरा सहगल को 1998 में पद्मश्री, 2002 में पद्मभूषण और 2010 में पद्म विभूषण से नवाजा जा चुका है।

जीवन परिचय

ज़ोहरा का जन्म 27 अप्रैल 1912 को उत्तर प्रदेश में रामर के रोहिल्ला पठान परिवार में हुआ। वे मुमताजुल्ला खान और नातीक बेगम की सात में से तीसरी संतान हैं। पारंपरिक सुन्नी मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ी ज़ोहरा बचपन से ही विद्रोही स्वभाव की थीं। खेलना-कूदना और धूम मचाना उन्हें पसंद था। बचपन में ही अपने चाचा के साथ भारत एशिया और यूरोप की सैर कार से की। लौटने पर उन्हें लाहौर के क्वीन मैरी कॉलेज में दाखिल करा दिया गया। उसके बाद 1935 में नृत्य गुरु उदय शंकर के नृत्य समूह से जुड़ गई और कई देशों की यात्रा की। आठ साल तक वह उनसे जुड़ी रहीं। वहीं ज़ोहरा की अपने पति कामेश्वर नाथ सहगल से मुलाकात हुईं। वे उनसे आठ साल छोटे थे। कामेश्वर इंदौर के युवा वैज्ञानिक, चित्रकार और नृतक थे। शुरुआती विरोध के बाद यह शादी हो गई। वे ज़ोहरा के लिए धर्म परिवर्तन को तैयार थे लेकिन ज़ोहरा ने कहा इसकी कोई ज़रूरत नहीं। अगस्त 1942 में दोनों ने शादी कर ली। इस शादी में जवाहरलाल नेहरू शामिल हाने वाले थे लेकिन भारत छोड़ो आंदोलन के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा। दोनों ने नृत्य समूह के साथ अल्मोड़ा में काम किया, जब यह बंद हो गया तब वे लाहौर चले गए और वहां अपना नृत्य समूह बनाया उनके दो बच्चे हुए। उन्हें भी आज़ादी थी अपनी मर्जी का धर्म चुनने की। इस बीच ज़ोहरा नास्तिक हो चली थीं और उनके पति यूं भी कोई धार्मिक नहीं थे। बेटी किरण सहगल ओडिसी नृत्यांगना हैं और बेटे पवन विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े हैं। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की पोती सीमा राय से शादी की है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 जिंदादिली के 100 साल (हिंदी) (एच.टी.एम.एल) डेली न्यूज़। अभिगमन तिथि: 8 फ़रवरी, 2013।
  2. सौवें बसन्त में एक नायाब कलाकार ज़ोहरा सहगल (हिंदी) (एच.टी.एम.एल) सुनील मिश्र। अभिगमन तिथि: 8 फ़रवरी, 2013।
  3. सिनेमा की 'लाडली' ज़ोहरा हुईं सौ साल की (हिंदी) (एच.टी.एम.एल) ज़ी न्यूज। अभिगमन तिथि: 8 फ़रवरी, 2013।

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