भारत छोड़ो आन्दोलन  

(भारत छोड़ो आंदोलन से पुनर्निर्देशित)


भारत छोड़ो आन्दोलन
महात्मा गाँधी
विवरण भारत को जल्द ही आज़ादी दिलाने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध यह एक बड़ा 'नागरिक अवज्ञा आन्दोलन' था।
शुरुआत 9 अगस्त, 1942
मूलमंत्र 'करो या मरो'
परिणाम 'भारत छोड़ो आन्दोलन' भारत को स्वतन्त्र भले न करवा पाया हो, लेकिन इसका दूरगामी परिणाम सुखदायी रहा। इसलिए इसे "भारत की स्वाधीनता के लिए किया जाने वाला अन्तिम महान् प्रयास" कहा गया।
आलोचना तत्कालीन भारतीय राजनीतिक दलों में 'साम्यवादी दल' ने इस आन्दोलन की आलोचना की। मुस्लिम लीग तथा उदारवादियों को भी यह आन्दोलन नहीं भाया।
अन्य जानकारी दिल्ली में जो उत्सव 15 अगस्त-1947 को मनाये जा रहे थे, उनमें महात्मा गाँधी शामिल नहीं थे। वे इस समय कलकत्ता में थे। राष्ट्र का विभाजन उनके लिये किसी बुरे सपने से कम नहीं था। गाँधी जी ने हिन्दू, सिक्ख और मुस्लिमों से कहा कि अतीत को भुलाकर अपनी पीड़ा पर ध्यान देने के बजाय एक-दूसरे के साथ आपसी भाईचारे की मिसाल को अपनायें।

भारत छोड़ो आन्दोलन 9 अगस्त, 1942 ई. को सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के आह्वान पर प्रारम्भ हुआ था। भारत की आज़ादी से सम्बन्धित इतिहास में दो पड़ाव सबसे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण नज़र आते हैं- प्रथम '1857 ई. का स्वतंत्रता संग्राम' और द्वितीय '1942 ई. का भारत छोड़ो आन्दोलन'। भारत को जल्द ही आज़ादी दिलाने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा अंग्रेज़ शासन के विरुद्ध यह एक बड़ा 'नागरिक अवज्ञा आन्दोलन' था। 'क्रिप्स मिशन' की असफलता के बाद गाँधी जी ने एक और बड़ा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निश्चय ले लिया। इस आन्दोलन को 'भारत छोड़ो आन्दोलन' का नाम दिया गया।

स्वतंत्रता की महान् लड़ाई

'भारत छोड़ो आन्दोलन' या 'अगस्त क्रान्ति भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन' की अन्तिम महान् लड़ाई थी, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को हिलाकर रख दिया। क्रिप्स मिशन के ख़ाली हाथ भारत से वापस जाने पर भारतीयों को अपनी छले जाने का अहसास हुआ। दूसरी ओर दूसरे विश्वयुद्ध के कारण परिस्थितियाँ अत्यधिक गम्भीर होती जा रही थीं। जापान सफलतापूर्वक सिंगापुर, मलाया और बर्मा पर क़ब्ज़ा कर भारत की ओर बढ़ने लगा, दूसरी ओर युद्ध के कारण तमाम वस्तुओं के दाम बेतहाश बढ़ रहे थे, जिससे अंग्रेज़ सत्ता के ख़िलाफ़ भारतीय जनमानस में असन्तोष व्याप्त होने लगा था। जापान के बढ़ते हुए प्रभुत्व को देखकर 5 जुलाई, 1942 ई. को गाँधी जी ने हरिजन में लिखा "अंगेज़ों! भारत को जापान के लिए मत छोड़ो, बल्कि भारत को भारतीयों के लिए व्यवस्थित रूप से छोड़ जाओ।"

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख


सुव्यवस्थित लेख
और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=भारत_छोड़ो_आन्दोलन&oldid=611766" से लिया गया