गिरिजा देवी  

गिरिजा देवी
गिरिजा देवी
पूरा नाम गिरिजा देवी
जन्म 8 मई, 1929
जन्म भूमि वाराणसी, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 24 अक्टूबर, 2017 (आयु- 88 वर्ष)
मृत्यु स्थान कोलकाता, पश्चिम बंगाल
अभिभावक रामदेव राय
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शास्त्रीय गायन
शिक्षा संगीत
पुरस्कार-उपाधि 'पद्म श्री (1972), 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' (1977), 'पद्म भूषण' (1989), 'राष्ट्रीय तानसेन सम्मान' (1996), पद्म विभूषण (2016)
प्रसिद्धि ठुमरी गायिका
विशेष योगदान 90 के दशक में आप 'काशी हिन्दू विश्वविद्यालय' से भी जुड़ीं और अनेक छात्र-छात्राओं को प्राचीन संगीत परम्परा की दीक्षा दी।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी उनकी एक कजरी "बरसन लगी" बहुत प्रसिद्ध हुई थी। अपने गायन में दक्ष होने के कारण ही गिरिजा देवी को 'ठुमरी की रानी' भी कहा जाता है।
अद्यतन‎

गिरिजा देवी (अंग्रेज़ी: Girija Devi; जन्म: 8 मई, 1929, वाराणसी, उत्तर प्रदेश - मृत्यु: 24 अक्टूबर, 2017 कोलकाता, पश्चिम बंगाल) भारत की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका हैं। उन्हें 'ठुमरी की रानी' कहा जाता है। वे बनारस घराने से सम्बन्धित हैं। गायकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1972 में 'पद्मश्री' और वर्ष 1989 में 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया गया था। गिरिजा देवी 'संगीत नाटक अकादमी' द्वारा भी सम्मानित की जा चुकी हैं।

जन्म तथा शिक्षा

गिरिजा देवी का जन्म 8 मई, 1929 को कला और संस्कृति की प्राचीन नगरी वाराणसी (तत्कालीन बनारस) में हुआ था। उनके पिता रामदेव राय एक ज़मींदार थे, जो एक संगीत प्रेमी व्यक्ति थे। उन्होंने पाँच वर्ष की आयु में ही गिरिजा देवी के लिए संगीत की शिक्षा की व्यवस्था कर दी थी। गिरिजा देवी के प्रारम्भिक संगीत गुरु पण्डित सरयू प्रसाद मिश्र थे। नौ वर्ष की आयु में पण्डित श्रीचन्द्र मिश्र से उन्होंने संगीत की विभिन्न शैलियों की शिक्षा प्राप्त की। इस अल्प आयु में ही एक हिन्दी फ़िल्म 'याद रहे' में गिरिजा ने अभिनय भी किया था।[1] गिरिजा देवी के गुरु पंडित सरजू प्रसाद मिश्र 'शास्त्रीय संगीत' के मूर्धन्य गायक थे। गिरिजा जी कि खनकती हुई आवाज़ जहाँ दुसरी गायिकाओं से उन्हें विशिष्ट बनाती है, वहीँ उनकी ठुमरी, कजरी और चैती में बनारस का ख़ास लहज़ा और विशुद्धता का पुट उनके गायन में विशेष आकर्षण पैदा करता है।

प्रथम प्रदर्शन

उनका विवाह 1946 में एक व्यवसायी परिवार में हुआ था। उन दिनों कुलीन विवाहिता स्त्रियों द्वारा मंच प्रदर्शन अच्छा नहीं माना जाता था। 1949 में गिरिजा देवी ने अपना पहला प्रदर्शन इलाहाबाद के आकाशवाणी केन्द्र से किया। यह देश की स्वतंत्रता के तत्काल बाद का उन्मुक्त परिवेश था, जिसमें अनेक रूढ़ियाँ टूटी थीं। संगीत के क्षेत्र में पण्डित विष्णु नारायण भातखंडे और पण्डित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने स्वतंत्रता से पहले ही भारतीय संगीत को जन-जन में प्रतिष्ठित करने का जो आन्दोलन छेड़ रखा था, उसका सार्थक परिणाम देश की आज़ादी के पश्चात् तेजी से दृष्टिगोचर होने लगा था।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 लोक-रस से अभिसिंचित ठुमरी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 6 अक्टूबर, 2012।
  2. गिरिजा देवी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 24 दिसम्बर, 2012।

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