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शोले (फ़िल्म) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

शोले (फ़िल्म)  

शोले (फ़िल्म)
Sholay-Movie.jpg
निर्देशक रमेश सिप्पी
निर्माता जी. पी. सिप्पी
लेखक सलीम-जावेद
कहानी सलीम-जावेद
पटकथा सलीम-जावेद
संवाद सलीम-जावेद
कलाकार धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, संजीव कुमार, अमजद ख़ान, असरानी
प्रसिद्ध चरित्र गब्बर सिंह
संगीत राहुल देव बर्मन
गीतकार आनंद बख्शी
गायक लता मंगेशकर, राहुल देव बर्मन, मन्ना डे, किशोर कुमार, भूपेंद्र सिंह
प्रसिद्ध गीत ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, महबूबा ओ महबूबा
छायांकन द्वारका दिवेचा
संपादन एम. एस. शिंदे
वितरक सिप्पी फ़िल्म्स
प्रदर्शन तिथि 15 अगस्त, 1975
भाषा हिन्दी
पुरस्कार 2005 में "Best Film of 50 year"
बजट तीन करोड़ रुपये
देश भारत
कला निर्देशक राम येडेकर
स्टंट मोहम्मद अली, जेरी क्रांपटन
नृत्य निर्देशक पी. एल. राज

आज से 44 साल पहले सन् 1975 में भारत के स्वतंत्रता दिवस पर फ़िल्म 'शोले' रिलीज़ हुई थी। इस फ़िल्म की शुरुआत तो बहुत मामूली थी लेकिन कुछ ही दिनों में यह फ़िल्म पूरे देश में चर्चा का विषय बन गयी। देखते ही देखते शोले सुपरहिट और फिर ऐतिहासिक फ़िल्म हो गई। इसकी लोकप्रियता का अनुमान सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि यह फ़िल्म मुंबई के 'मिनर्वा टाकीज़' में 286 सप्ताह तक चलती रही। 'शोले' ने भारत के सभी बड़े शहरों में 'रजत जयंती' मनायी। शोले ने अपने समय में 2,36,45,000,00 रुपये कमाए जो मुद्रास्फीति को समायोजित करने के बाद 60 मिलियन अमरीकी डॉलर के बराबर हैं।

कहानी

फ़िल्म की कहानी बहुत ही साधारण है, पर रमेश सिप्पी के निर्देशन ने इसमें अलग ही जान डाल दी थी। सेवानिवृत्त पुलिस अफ़सर ठाकुर बलदेव सिंह (संजीव कुमार), डाकू गब्बर सिंह (अमजद ख़ान) को गिरफ्तार करते हैं, पर वो जेल से भागने मे कामयाब हो जाता है। बदला लेने के लिए वह ठाकुर के परिवार का ख़ून कर देता है। ठाकुर गब्बर को जिंदा पकड़ने के लिए दो बहादुर लोफर जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेन्द्र) की मदद लेता है। रामगढ़ में इनकी मुलाक़ात राधा (जया बच्चन) और बसंती (हेमा मालिनी) से होती है। और फिर शुरू होती है गब्बर को जिंदा पकड़ने की कवायद।

प्रशंसनीय फ़िल्म

'तेरा क्या होगा कालिया' संवाद आज भी सबके दिलों दिमाग़ पर छाया है। शोले हिन्दी सिनेमा की सबसे प्रशंसनीय फ़िल्मों में से एक फ़िल्म है। एक गाँव रामगढ़ में निर्देशित, यह एक परंपरागत हिन्दी फ़िल्म है जो आज तक हिन्दी फ़िल्म प्रशंसकों के दिल मे घर किये बैठी है। हज़ारों बार देखने बाद भी लोग इसे देखकर नहीं थकते। जय और वीरू की दोस्ती, गब्बर सिंह का डर, सूरमा भोपाली और जेलर का हास्य, और ताँगे वाली बसंती और उसकी धन्नो- हर पात्र ने दिलोदिमाग़ पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। इस फ़िल्म के कई ऐसे दृश्य है जो आज भी फ़िल्मों मे आज़माए जाते हैं। जैसे-

  • वीरू का पानी की टंकी से आत्महत्या का ड्रामा।
  • जय का वीरू के लिए मौसी जी से बसंती का हाथ माँगना।
  • हेलेन का महबूबा महबूबा गाना।
सलीम-जावेद की जोड़ी

व्यापारिक दृष्टिकोण से फ़िल्म बहुत ही सफल रही। सफलता का मुख्य कारण है उसकी कहानी और उसकी भाषा। आज के सबसे बेहतरीन फ़िल्म लेखक जावेद अख्तर के इम्तिहान की फ़िल्म थी यह। 'यक़ीन' जैसी फ्लॉप फ़िल्मों से शुरू करके उन्होंने सलीम ख़ान के साथ जोड़ी बनायी थी। दोनों जी.पी. सिप्पी के बैनर के लेखक थे। 'अंदाज़', 'सीता और गीता' जैसी फ़िल्मों के लिए यह जोड़ी कहानी लिख चुकी थी और जब शोले बनी तो कम दाम देकर इन्हीं लेखकों से कहानी और संवाद लिखवा लिए गए और उसके बाद तो जिधर जाओ वहीं इस फ़िल्म के डायलॉग सुनने को मिल जाते थे।

यादगार संवाद

सलीम-जावेद की जोड़ी ने संवादों में रचनात्मक काम किया है। उनमें से कुछ प्रसिद्ध है-

  • 'अरे ओ सांभा, कितने आदमी थे?'
  • वो दो थे, और तुम तीन। फिर भी ख़ाली हाथ लौट आये।
  • कितना इनाम रखे है, सरकार हम पर।
  • यहाँ से पचास कोस दूर गाँवों में, जब बच्चा नहीं सोता है, तो माँ कहती है- सो जा बेटा, नहीं तो गब्बर आ जायेगा।
  • बहुत नाइंसाफी है।
  • 'बहुत याराना लगता है?'
  • 'इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई?'
  • 'वो ही कर रहा हूँ भैया जो मजनूं ने लैला के लिए किया था, राँझा ने हीर के लिए था, रोमियो ने जूलिएट के लिए था… सुसाईड'
  • 'तुम्हारा नाम क्या है बसंती?'
  • 'साला नौटंकी, घड़ी घड़ी ड्रामा करता है।'
  • 'अब तेरा क्या होगा कालिया?'
  • 'ये हाथ नहीं फाँसी का फंदा है।'
  • 'ये हाथ हमको दे दे ठाकुर।'
  • 'तेरे लिए तो मेरे पैर ही काफ़ी हैं।'
  • 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना।'
  • 'आधे दाएँ जाओ, आधे बाएँ, बाकी मेरे पीछे आओ।'
  • 'हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं।'

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. शोले - फ़िल्मी इतिहास का एक अनमोल पन्ना (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  2. शोले (Sholay Movie) (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  3. शोले - फ़िल्मी इतिहास का एक अनमोल पन्ना (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  4. शोले - फ़िल्मी इतिहास का एक अनमोल पन्ना (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  5. शोले - फ़िल्मी इतिहास का एक अनमोल पन्ना (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  6. शोले : इतिहास बनी (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
  7. लोगों पर अब भी छाया है शोले का जादू : जावेद अख्तर (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2011।
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