जागते रहो  

जागते रहो
जागते रहो
निर्देशक अमित मैत्रा और शम्भू मित्रा
निर्माता राज कपूर
पटकथा के.ए. अब्बास, अमित मैत्रा और शम्भू मित्रा
कलाकार राज कपूर, मोतीलाल और नर्गिस
संगीत सलिल चौधरी
छायांकन राधु कर्माकर
वितरक आर. के. स्टूडियो
प्रदर्शन तिथि 1956
अवधि 149 मिनट
भाषा हिंदी, बांग्ला

जागते रहो वर्ष 1956 में बनी हिन्दी भाषा की एक फ़िल्म है जिसमें राज कपूर ने अभिनय किया था। अपने समय में जागते रहो ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के फ़िल्म समारोह में पुरस्कार जीता भी था। जागते रहो, एक सामाजिक व्यंग्य है। इसने समाज के सामने एक चेतावनी प्रस्तुत की समाज को पूरी तरह भ्रष्ट होने से बचाने के लिये। यह एक प्रयास था समाज में मौजूद मासूमियत को बचाये रखने के लिये। सामाजिक रुप से फ़िल्म अपने उद्देश्यों में कितनी सफल रही इस पर वाद-विवाद और बहस की पूरी गुंजाइश है क्योंकि पिछली सदी के पचास के दशक से अब तक पिछले साठ सालों में भ्रष्टाचार तो बेतहाशा बढ़ा है।

कथावस्तु

जागते रहो सामाजिक व्यंग्य की नदी पर हास्य की लहरें बहाती हुई लाती है और भ्रष्टाचार की खम ठोक कर जम चुकी चटटानों को परत दर परत खुरचने और रेत बनाने का काम करती जाती हैं। जागते रहो सिर्फ वही नहीं है जो साफ साफ परदे पर दिख रहा है बल्कि यह रुपक की भाषा में काम करती है। शायद बिल्कुल ऐसा न होता हो या न हो सकता हो पर फंतासी के स्तर पर विचरती हुई दृष्टान्तों की प्रकृति लेकर भी यह घनघोर यथार्थवादी स्वभाव की फ़िल्म के रुप में सामने आती है।

कलाकार

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 जागते रहो(1956) : जागो भारत प्यारे जागो (हिंदी) cine manthan। अभिगमन तिथि: 25 मार्च, 2013।

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