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सत्यकाम (फ़िल्म) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

सत्यकाम (फ़िल्म)  

सत्यकाम (फ़िल्म)
सत्यकाम.jpg
निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी
निर्माता धर्मेन्द्र
लेखक नारायण सान्याल
कहानी नारायण सान्याल
पटकथा बिमल दत्ता
संवाद राजेन्द्र सिंह बेदी
कलाकार धर्मेन्द्र, शर्मिला टैगोर, अशोक कुमार, संजीव कुमार, रोबी घोष, डेविड, तरूण बोस, राजन हक्सर, मनमोहन, बाल कलाकार- सारिका
प्रसिद्ध चरित्र सत्यप्रिय आचार्य
संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
गीतकार कैफ़ी आज़मी
गायक लता मंगेशकर, मुहम्मद रफ़ी
प्रसिद्ध गीत "दो दिन की ज़िन्दगी. कैसी है ज़िन्दगी", "अभी क्या सुनोगे सुना तो हंसोगे कि है गीत अधूरा तराना अधूरा"
प्रदर्शन तिथि 1969
भाषा हिन्दी
देश भारत
अद्यतन‎

सत्यकाम, ऋषिकेश मुखर्जी की सबसे अच्छी फ़िल्मों में से है। उन्होंने बहुत ही अच्छे विषय को लेकर एक बहुत ही प्रभावशाली फ़िल्म बनायी है। इस विषय पर इतनी अच्छी और रोचक फ़िल्म हिन्दी सिनेमा में बहुत ही कम हैं और निस्संदेह सत्यकाम इस श्रेणी की फ़िल्मों में सर्वोच्च स्थान रखती है। यह फ़िल्म अपने आप में जीवन मूल्यों का एक ऐसा अनूठा और आदर्श दर्शन है जिसकी मिसाल आज भी संजीदा फ़िल्मकार और कलाकार देते हैं।

प्रदर्शन का समय

सत्यकाम का प्रदर्शन काल 1969 का है। प्रख्यात फ़िल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी ने इस फ़िल्म का निर्देशन किया था। भारतीय सिनेमा के सदाबहार सुपर सितारे धर्मेन्द्र इस फ़िल्म के नायक थे। नायिका की भूमिका निभाई थी प्रसिद्ध अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने। धर्मेन्द्र वस्तुत: ऋषिकेश मुखर्जी के प्रिय नायक थे। वह उनसे उस दिन से प्रभावित थे, जब धर्मेन्द्र को उन्होंने बिमल राय की फ़िल्म बन्दिनी में डॉक्टर की भूमिका में देखा था। ऋषिकेश मुखर्जी के साथ सत्यकाम को याद करते हुए धर्मेन्द्र भावुक हो जाते हैं। वह बताते है कि हृषि दा अपने आपमें एक इन्स्टीटयूट थे। उनके साथ काम करना अपने पिता अपने अभिभावक के साथ काम करने की तरह था। यह मेरी खुशकिस्मती ही कही जाएगी कि उनके साथ मुझे अनुपमा, मझली दीदी, गुड्डी, सत्यकाम, चुपके-चुपके और चैताली में काम करने का अवसर मिला। वे मेरे कैरियर की उत्कृष्ट फ़िल्में हैं। ऋषिकेश मुखर्जी ने फ़िल्म सत्यकाम को जिस गुणवत्ता और संजीदगी से बनाया था वह अपने आप में मिसाल है। उल्लेखनीय है कि ऋषिकेश मुखर्जी महान् फ़िल्मकार बिमल राय के साथ उनकी फ़िल्मों का सम्पादन करते थे। उन्हीं बिमल राय का यह जन्मशताब्दी वर्ष भी है। बिमल राय ने ही ऋषिकेश मुखर्जी को सम्पादन के साथ-साथ सहायक निर्देशक, मुख्य सहायक निर्देशक और एसोसिएट डायरेक्टर तक की ज़िम्मेदारी सौंपी। ऋषिकेश मुखर्जी ने अपने कैरियर की पहली फ़िल्म मुसाफिर 1957 में निर्देशित की थी। सत्यकाम तक आते-आते वह अनाड़ी, अनुराधा, छाया, मेम दीदी, अनुपमा, मझली दीदी और आशीर्वाद जैसे कई श्रेष्ठ फ़िल्में बना चुके थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. Satyakam (अंग्रेज़ी)। । अभिगमन तिथि: 29 सितम्बर, 2011।

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